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ईरान के साथ आया भारत, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मसूद से बात की, South Pars गैस फ़ील्ड पर हमले की निंदा


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oi-Bhavna Pandey

PM Modi speaks to Iran’s President: मिडिल ईस्‍ट में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियां से बात की।

उन्‍होंने ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं, साथ ही पश्चिमी एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति पर भी चर्चा की। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के मद्देनज़र यह संवाद महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच सहयोग की अहमियत को दोहराया।

PM Modi speaks to Iran s President

बातचीत के दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि की उम्मीद जताई। मोदी ने महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि ऐसे हमले ना सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी प्रभावित करते हैं।

साथ ही, प्रधानमंत्री ने समुद्री मार्गों और नौवहन की सुरक्षा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने ईरान की सराहना भी की कि वह इस मुश्किल समय में भारत के नागरिकों की सुरक्षा में लगातार सहयोग कर रहा है

PM Modi speaks to Iran s President

पीएम मोदी ने ईरानी राष्‍ट्रपति से क्‍या कहा?

पीएम मोदी ने कहा, ऐसे हमलों की निंदा की जाती है “जो क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं।” उन्होंने वैश्विक व्यापार की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। मोदी ने दोहराया कि “नेविगेशन की स्वतंत्रता की रक्षा करना और शिपिंग लेन को खुला और सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।”

युद्ध छिड़ने के बाद भी पीएम ने की थी बात

पश्चिमी एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से यह प्रधानमंत्री और ईरान के राष्ट्रपति के बीच दूसरी टेलीफोनिक बातचीत थी। तब मोदी ने पेज़ेश्कियान से “क्षेत्र में गंभीर स्थिति” पर चर्चा की थी, जहां “तनाव बढ़ने, नागरिक हताहतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता” व्यक्त की थी।

पीएम ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और “माल तथा ऊर्जा के निर्बाध पारगमन की आवश्यकता” का मुद्दा भी उठाया था, जिन्हें भारत की “शीर्ष प्राथमिकताएँ” बताया गया था।

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय नेतृत्व खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ लगातार संपर्क में है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराक़ची से बिगड़ती स्थिति पर कई बार बातचीत की है।

20 से अधिक फंसे हैं भारतीय जहाज

प्रधानमंत्री की शिपिंग लेन सुरक्षित रखने की चिंता ऐसे में सामने आईं, जब फारस की खाड़ी क्षेत्र में 20 से अधिक भारतीय जहाज फंसे हुए हैं और स्ट्रेट ऑफ हरमुज के माध्यम से यातायात बड़े पैमाने पर बाधित है।

हालांकि पिछले सप्ताह दो भारतीय झंडे वाले एलपीजी वाहक – ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ – 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सफलतापूर्वक इस जलडमरूमध्य से गुजरे।पश्चिमी एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से यह प्रधानमंत्री और ईरान के राष्ट्रपति के बीच दूसरी टेलीफोनिक बातचीत थी।

मिडिल ईस्‍ट में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा

नवीनतम घटनाक्रमों में, ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार अली मोहम्मद नैनी ने इज़राइल को चेतावनी दी कि यदि वह कोई ‘रणनीतिक गलती’ करता है, तो ईरान उसे गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान ने इज़राइल को चारों ओर से घेर लिया है और अगर ज़ायोनी शासन गाज़ा के खिलाफ कोई तर्कहीन कदम उठाता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी।

अमेरिकी ने बढ़ाई सेना

ईरानी धमकियों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने मिडिल ईस्‍ट में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। अमेरिका ने विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और उसके स्ट्राइक ग्रुप को तैनात किया है, साथ ही यूएसएस ड्वाइट डी. आइजनहावर को भी क्षेत्र में भेजा गया है। पेंटागन ने थिएटर हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) और पैट्रियट मिसाइल बैटरी जैसी हवाई रक्षा प्रणालियाँ भी तैनात की हैं।

इज़राइल पीएम ने दी धमकी

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल हमास को “कुचल कर बर्बाद” कर देगा। यह स्पष्ट संदेश क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा रहा है।

क्‍या बोले ट्रंप?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी रैली में ईरान पर अपनी सख्त नीति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में ईरान के प्रमुख तेल क्षेत्र “कंगाल” थे, जबकि बाइडेन प्रशासन के तहत ईरान फिर से “अमीर” हो गया है। उनके बयानों ने अमेरिका में ईरान नीति पर बहस को तेज कर दिया है।

वैश्विक तेल मार्गों ने बढ़ाई चिंता

बढ़ता तनाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के लिए चिंता का विषय है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। यूएई और सऊदी अरब जैसे अमेरिकी सहयोगी भी ईरान की आक्रामक गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं, जिससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।



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