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ईरान में जंग खिंचना कितना चिंताजनक?: रिपोर्ट में दावा- तेल संकट और विकराल होने की आशंका, खतरे कम आंक रहे बाजार


पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच वैश्विक वित्तीय बाजार अभी भी जोखिमों को पूरी तरह कीमतों में शामिल नहीं कर रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की हालिया रणनीति रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि बाजारों का व्यवहार जमीनी हकीकत से मेल नहीं खा रहा।

निवेशकों का क्या मानना है?

रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में सीमित तनाव की धारणा अब भी बनी हुई है। निवेशकों का मानना है कि संघर्ष ज्यादा नहीं बढ़ेगा, जबकि हाल के घटनाक्रम इस सोच को चुनौती दे रहे हैं। अमेरिका की सैन्य सक्रियता और ईरान से जुड़े सीधे टकराव की स्थिति ने यह संकेत दिया है कि हालात और बिगड़ सकते हैं। जेफरीज ने साफ कहा है कि सैन्य टकराव के और बढ़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन यह जोखिम अभी बाजार की वैल्यूएशन में नजर नहीं आ रहा।

ऊर्जा आपूर्ति पर क्या अनुमान?

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, वहां आंशिक रुकावट के संकेत मिल रहे हैं। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिसका असर वैश्विक महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यदि यह संकट तीन से चार महीने तक जारी रहता है, तो यह वैश्विक स्तर पर एक प्रणालीगत संकट बन सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल को लंबे समय तक खाड़ी क्षेत्र में फंसा नहीं रखा जा सकता, इसके गंभीर परिणाम होंगे।

रिपोर्ट में किन चीजों को लेकर चिंता?

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बाजार केवल प्रत्यक्ष असर ही नहीं, बल्कि इसके दूसरे चरण के प्रभावों को भी कम आंक रहे हैं। बढ़ती ऊर्जा कीमतों का असर तकनीकी क्षेत्र पर भी पड़ेगा, खासकर डेटा सेंटर के निर्माण लागत पर, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भर हैं।

इसके साथ ही, रेड सी में बढ़ती बाधाएं और हूती विद्रोहियों की सक्रियता से सप्लाई चेन पर बहुस्तरीय दबाव बनने की आशंका है। इससे वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क प्रभावित हो सकते हैं।

इसके बावजूद, वैश्विक बाजार अभी भी एक सकारात्मक आधार मानकर चल रहे हैं, जो मौजूदा परिस्थितियों में टिकाऊ नहीं दिखता। जेफरीज का मानना है कि बाजार अभी भी इस संकट की गंभीरता और कच्चे तेल से जुड़े महंगाई के जोखिम को पूरी तरह समझ नहीं पा रहे हैं, जबकि सप्लाई में लंबे समय तक बाधा आने की संभावना लगातार बढ़ रही है।



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