Homeउत्तराखंडईरान युद्ध पर कितना खर्च कर रहा है अमेरिका? रोज का आंकड़ा...

ईरान युद्ध पर कितना खर्च कर रहा है अमेरिका? रोज का आंकड़ा देखकर ट्रंप के उड़े होश


International

oi-Bhavna Pandey

US-Israel-Iran War: मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान का टकराव अब सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भारी पड़ रहा है। ईरान को हराने के लिए अमेरिका युद्ध पर हर दिन पानी की तरह पैसा बहा रहा है। आलम ये है कि आर्थिक रूप से सबसे संपन्‍न देश अमेरिका में युद्ध पर की जा रही अंधाधुंध खर्च का विरोध शुरू हो चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इस संघर्ष पर रोज़ करीब 891 मिलियन डॉलर यानी लगभग 7400 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। सिर्फ पहले हफ्ते में ही खर्च 6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह टकराव लंबा चला तो इसकी कुल लागत दसियों अरब डॉलर तक जा सकती है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और तेल-गैस बाजार पर भी दिखने लगा है।

US-Israel-Iran War

पहले हफ्ते में ही 6 बिलियन डॉलर खर्च

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कांग्रेस को बताया कि युद्ध के शुरुआती सात दिनों में करीब 6 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। वॉशिंगटन के थिंक टैंक Center for Strategic and International Studies (CSIS) के मुताबिक यह खर्च औसतन 891.4 मिलियन डॉलर प्रतिदिन बैठता है।
रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि आने वाले समय में सरकार को युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस से अतिरिक्त बजट मांगना पड़ सकता है।

गोला-बारूद पर ही 4 बिलियन डॉलर

इस भारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा हथियारों और इंटरसेप्टर मिसाइलों पर गया है।
लगभग 4 बिलियन डॉलर सिर्फ गोला-बारूद पर खर्च हुए, जिनमें मुख्य रूप से ईरानी मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर शामिल हैं। यह खर्च पिछले साल ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हुए Operation Midnight Hammer से भी ज्यादा है, जिसमें करीब दो घंटे के हमलों में लगभग 2.04 से 2.26 बिलियन डॉलर खर्च हुए थे।

क्षेत्र में 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक

मौजूदा समय में मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ी है। करीब 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक, दो विमानवाहक पोत और दर्जनों युद्धपोत तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही अतिरिक्त बमवर्षक और हमलावर विमान भी लगातार क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, जिससे सैन्य अभियान और तेज हो गया है।

युद्ध की दैनिक लागत का हिसाब

CSIS के अनुसार रोजाना खर्च का मोटा-मोटा बंटवारा कुछ इस तरह है

हवाई अभियानों पर: लगभग 30 मिलियन डॉलर

नौसैनिक अभियानों पर: करीब 15 मिलियन डॉलर

जमीनी अभियानों पर: लगभग 1.6 मिलियन डॉलर

ये आंकड़े बताते हैं कि संघर्ष कितनी तेजी से संसाधन निगल रहा है।

छोटे देशों की अर्थव्यवस्था से भी ज्यादा खर्च

युद्ध की लागत को समझने के लिए तुलना करें तो तस्वीर और चौंकाने वाली हो जाती है। अमेरिका हर दो दिन में भारत के पूरे साल के अंतरिक्ष बजट के बराबर पैसा खर्च कर रहा है। 10 दिनों में पाकिस्तान के पूरे रक्षा बजट जितना खर्च और दो महीने से भी कम समय में नेपाल के पूरे जीडीपी केबराबर रकम खर्च हो सकती है।

तेल और गैस बाजार में हलचल

मिडिल-ईस्‍ट में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। Strait of Hormuz से गुजरने वाला तेल टैंकर यातायात लगभग रुक गया है। यह रास्ता दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 25% संभालता है।

इस बीच Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार ड्रोन हमले के बाद Ras Tanura Refinery को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इसके चलते Brent Crude Oil की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई और 119.50 डॉलर तक चली गई।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा

ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल से यूरोप की अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा बढ़ गया है।
ईंधन महंगा होने से परिवहन और उद्योगों की लागत बढ़ रही है, जिसका असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ सकता है।

अमेरिका में भी शुरू हुआ विरोध

इस युद्ध को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। हाउस डेमोक्रेटिक कॉकस के अध्यक्ष Pete Aguilar ने आरोप लगाया कि प्रशासन अरबों डॉलर युद्ध पर खर्च कर रहा है जबकि देश के अंदर स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं में कटौती हो रही है। वहीं राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग दोहराई है।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments