पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद अब भारत सरकार ने हवाई यात्रियों को बड़ी राहत दी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बुधवार को घरेलू एयरलाइंस के लिए एयरपोर्ट्स पर लगने वाले लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 प्रतिशत की भारी कटौती का एलान किया है। इस कदम का सीधा मकसद विमान ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों के बावजूद हवाई टिकटों के दाम को नियंत्रण में रखना है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिम एशिया संकट के कारण विमान ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया है। ऐसे में एयरलाइंस पर परिचालन लागत का बोझ बढ़ गया था। अगर सरकार यह कदम नहीं उठाती, तो एयरलाइंस इसका सीधा बोझ यात्रियों पर डालतीं, जिससे टिकटों की कीमतें आसमान छूने लगतीं। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का मुख्य उद्देश्य आम नागरिक के लिए हवाई सफर को किफायती और सुविधाजनक बनाना है।
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400 करोड़ रुपये की मिलेगी राहत
सरकार के इस फैसले से देश की एयरलाइंस कंपनियों को अगले तीन महीनों में लगभग 400 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। मंत्रालय ने एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को तुरंत प्रभाव से इन निर्देशों को लागू करने के लिए कहा है।
सरकार की पैनी नजर
नायडू ने बताया कि वैश्विक स्तर पर विमान ईंधन की कीमतों में 100 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि देखी गई है, लेकिन सरकार ने घरेलू स्तर पर इसका बहुत सीमित असर होने दिया है। एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने भविष्य में टैरिफ निर्धारण के दौरान एडजस्टमेंट का विकल्प खुला रखा है। मंत्रालय लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है। जरूरत पड़ने पर भविष्य में और भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।



