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कर्ज के दलदल में फंसा जुआरी बना हैवान, एक फोन कॉल ने उजाड़ दी हंसती खेलती दुनिया, पत्नी और 3 मासूम बेटियों का कत्ल


नई दिल्ली: देश की राजधानी के बाहरी उत्तरी जिले समयपुर बादली इलाके से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. एक शख्स, जो कर्ज के बोझ तले दबा था और जुए की लत का शिकार था, उसने अपनी ही पत्नी और तीन मासूम बेटियों की गला रेतकर हत्या कर दी. इस हत्याकांड के पीछे की वजह महज एक फोन कॉल बताई जा रही है, जिसने आरोपी मुनचुन केवट के भीतर के इंसान को हैवान बना दिया. पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी भी सभ्य समाज के लिए एक चेतावनी की तरह हैं.

एक फोन कॉल और मौत का सामान

पुलिस के अनुसार, इस खौफनाक मंजर की पटकथा 23 फरवरी को ही लिखी जा चुकी थी. 42 वर्षीय मुनचुन केवट को उस दिन एक लेनदार, मिथिलेश का फोन आया था. मुनचुन क्रिकेट सट्टेबाजी और ताश के पत्तों के खेल का आदी था, जिसके चलते उस पर लाखों का कर्ज हो गया था. फोन पर हुई बातचीत के दौरान मिथिलेश और मुनचुन के बीच तीखी बहस हुई. आरोप है कि मिथिलेश ने पैसों की वसूली के लिए मुनचुन की पत्नी अनिता और बच्चों को बंधक बनाने या उनसे काम करवाने की धमकी दी. इस अपमान और डर ने मुनचुन को इस कदर पागल कर दिया कि उसने उसी दिन दोपहर 1 बजे मंडी से 90 रुपये का एक बड़ा चाकू खरीदा, जो आमतौर पर कटहल काटने के काम आता है.

साजिश और कत्ल की रात

हैरानी की बात यह है कि मुनचुन ने इस वारदात को तुरंत अंजाम नहीं दिया. वह चाकू को बैग के नीचे छिपाकर घर ले आया. 24 फरवरी को वह सामान्य रूप से काम पर गया और मंगलवार होने के कारण उसने व्रत भी रखा. शाम को वह अपने परिवार को होली की खरीदारी कराने बाजार भी ले गया, ताकि किसी को शक न हो. लेकिन रात 11:30 बजे जब पत्नी अनिता ने फिर से कर्ज और लेनदार के फोन का जिक्र किया, तो विवाद बढ़ गया. मुनचुन रात भर जागता रहा. तड़के 4 बजे जब अनिता की नींद खुली और उसने मुनचुन से जागने का कारण पूछा, तो उसने बिना सोचे-समझे चाकू से उसका गला रेत दिया. शोर सुनकर बड़ी बेटी जाग गई और रोने लगी, जिसके बाद मुनचुन ने एक-एक करके अपनी तीनों बेटियों को भी मौत के घाट उतार दिया. तीनों बच्चों की उम्र 3 से 5 साल के बीच थी.

पुलिस की मुस्तैदी और गिरफ्तारी

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी खुदकुशी करना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा सका. वह बिना टिकट ट्रेन पकड़कर अजमेर भाग गया, जहां उसने पहले काम किया था. दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 6 विशेष टीमें बनाईं. स्पेशल सीपी रविंद्र और डीसीपी हरेश्वर स्वामी के नेतृत्व में पुलिस ने 800 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद ली. मुनचुन के पुराने ठिकानों, जैसे तमिलनाडु और राजस्थान में छापेमारी की गई. तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसे अजमेर के पास किशनगढ़ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया.

जुए की लत ने छीना सब कुछ

जांच में पता चला कि मुनचुन ने पिछले महीने ही अपने ससुराल वालों से 2 लाख रुपये उधार लिए थे. इसमें से उसने 60,000 रुपये मिथिलेश को और 40,000 रुपये एक अन्य सप्लायर को दिए थे, लेकिन बाकी बचे 1 लाख रुपये उसने फिर से सट्टेबाजी में गंवा दिए. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुनचुन पहले भी चोरी के मामलों में शामिल रहा है और सोशल मीडिया पर हथियार लहराते हुए उसकी तस्वीरें भी मिली हैं. फिलहाल पुलिस मिथिलेश की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिसकी धमकी ने मुनचुन को इस आत्मघाती कदम के लिए उकसाया. यह घटना दर्शाती है कि कैसे कर्ज और जुआ एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं.



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