Uttarakhand
oi-Pavan Nautiyal
Entry of non-Hindus controversy उत्तराखंड में चार धाम यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा इस बार जिस विषय को लेकर चर्चा है, वह है गैर हिंदूओं, सनातनियों के प्रवेश को लेकर छिड़ी बहस। बदरीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति ने पहले ही नियम बनाने की बात कर दी है।
बीकेटीसी ने गैर हिंदूओं को शपथ पत्र देने के बाद ही दर्शन करने की बात की है। उधर गंगोत्री धाम में गैर सनातनियों का प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति ने गंगाजल और गौमूत्र से तैयार पंचगव्य ग्रहण को अनिवार्य कर दिया है।

बता दें कि बदरी-केदार मंदिर समिति ने केदारनाथ और बदरीनाथ में गैर हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने एवं एफिडेविट व्यवस्था लागू करने को लेकर अपनी बोर्ड बैठक में फैसला लिया है। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में गैर (हिंदुओं) सनातनियों के प्रतिबंध को लेकर नई और अनोखी व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया है। श्री 5 मंदिर समिति गंगोत्री धाम के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि गंगोत्री धाम में गैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध के कानूनी और संवैधानिक पहलू को लेकर एक कमेटी बनाई गई है।
गैर सनातनियों के प्रतिबंध के धार्मिक पहलू पर भी जोर
उन्होंने कहा कि गंगोत्री में गैर सनातनियों के प्रतिबंध के धार्मिक पहलू पर भी जोर दिया जाएगा। कहा कि गंगोत्री धाम में दर्शन से पहले पंचगव्य की व्यवस्था रखी जाएगी, जो इसे ग्रहण करता है, उसे सनातन में आस्था रखने वाला माना जा सकता है। श्री पांच मंदिर समिति गंगोत्री धाम के सचिव और उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि जो गौ माता को मानता है और पंचगव्य का आचमन करता है, वो सनातनी हैं।
पंचगव्य ग्रहण करता है तो धाम में प्रवेश मिलेगा
कहा कि भारत में रहने वाले हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध सभी सनातन के अंतर्गत आते हैं। इसके अलावा किसी धर्म का व्यक्ति यदि गंगोत्री धाम आता है तो वो पंचगव्य ग्रहण करता है तो उसे धाम में प्रवेश मिलेगा। उन्होंने कहा कि गैर हिंदू या गैर सनातनी गंगोत्री धाम आकर पंचगव्य ग्रहण कर और गंगा मां में डुबकी लगा कर सनातन धर्म में घर वापसी कर सकता है। यमुनोत्री धाम में इसको लेकर 24 मार्च को मां यमुना के अवतरण दिवस पर फैसला लिया जाएगा।पंचगव्य का अर्थ पंच यानी पांच और गव्य यानी गाय से प्राप्त पदार्थ है। जिसमें दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर शामिल होते हैं। इसके साथ ही गंगाजल और शहद भी मिलाया जाता है। हिंदू परंपरा में इसका काफी महत्व है।
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