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Who is Sahil Chauhan: सीबीआई ने थाईलैंड से हरियाणा पुलिस के मोस्ट वांटेड अपराधी साहिल चौहान को डिपोर्ट कराकर भारत वापस लाया है. साहिल, उत्तर भारत के कुख्यात भुप्पी राणा गैंग का सक्रिय सदस्य है और 2017 के जगाधरी कोर्ट शूटआउट का मुख्य आरोपी है. हत्या, डकैती और अवैध हथियार रखने जैसे संगीन जुर्मों के बाद वह जमानत पर फरार होकर बैंकॉक भाग गया था. इंटरपोल के रेड नोटिस के जरिए उसे पकड़ा गया. यह रिपोर्ट साहिल चौहान की अपराध की दुनिया, उसके गैंगवार और सीबीआई के इस बड़े एक्शन की पूरी ‘क्राइम कुंडली’ पेश करती है.
साहिल चौधरी की क्राइम कुंडली.
Haryana Gangster Sahil Chauhan: कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी चाहे सात समंदर पार भी क्यों न छिपा हो, उसे वापस आना ही पड़ता है. 10 अप्रैल 2026 की रात जब दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर एक फ्लाइट लैंड हुई, तो वहां हरियाणा पुलिस की एक स्पेशल टीम पहले से तैनात थी. फ्लाइट से नीचे उतरने वाला शख्स कोई आम इंसान भगोड़ा नहीं था, बल्कि हरियाणा का मोस्ट वांटेड शूटर साहिल चौहान था.
अब ये जानना जरूरी है ये साहिल कौन है? आखिर भारतीय खुफिया एजेंसियां इसके पीछे क्यों पड़ी हुईं थी? इसका क्राइम क्या था कि इसे सात समंदर पार से डिपोर्ट करके लाया जा रहा है? क्या ये भारत विरोधी ताकतों के साथ काम कर रहा था या फिर ये भारत को अशांत करने की कोशिश कर रहा था? चलिए जानते हैं साहिल चौहान के बारे में.
भुप्पी राणा गैंग का राइट हैंड
साहिल चौहान की क्राइम कुंडली का सबसे बड़ा अध्याय भारत के कुख्यात भुप्पी राणा गैंग से जुड़ा है. हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में सक्रिय यह गैंग रंगदारी, हत्या और सुपारी लेकर हत्या करने के लिए कुख्यात है. साहिल इस गैंग का न केवल सदस्य था, बल्कि वह गैंग के सरगना भुप्पी राणा का बेहद करीबी और भरोसेमंद शूटर माना जाता था. उसके ऊपर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामले दर्ज हैं.
जब जगाधरी कोर्ट में बरसाईं थीं गोलियां
साहिल चौहान के अपराध की दुनिया का सबसे खौफनाक मंजर 4 जनवरी 2017 को देखने को मिला था. यमुनानगर के जगाधरी कोर्ट परिसर में उस दिन भारी सुरक्षा थी, क्योंकि कुख्यात बदमाश मोनू राणा को पेशी के लिए लाया गया था. जैसे ही मोनू राणा कोर्ट परिसर में पहुंचा, साहिल चौहान और उसके साथियों ने फिल्मी स्टाइल में ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी.
इस गैंगवार ने पूरे हरियाणा को दहला दिया था. कोर्ट के अंदर घुसकर पुलिस की मौजूदगी में गोलीबारी करना साहिल के दुस्साहस को दर्शाता था. इस हमले में मोनू राणा को कई गोलियां लगी थीं. इस मामले में पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद साहिल को गिरफ्तार किया और उसे 10 साल की सजा भी सुनाई गई.
जमानत, फरारी और ‘बैंकॉक’ ठिकाना
सजा मिलने के कुछ समय बाद साहिल चौहान को कानूनी पेचीदगियों के चलते जमानत मिल गई. लेकिन बाहर आते ही उसने कानून को ठेंगा दिखाया और अपनी लोकेशन बदलकर विदेश भागने की योजना बनाई. वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर थाईलैंड पहुँच गया और वहां बैंकॉक में छिपकर अपना ‘नेटवर्क’ चलाने लगा. उसे लगा था कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने के बाद वह सुरक्षित है, लेकिन सीबीआई की नजर उस पर टिकी थी.
CBI का चक्रव्यूह कैसे फंसा
साहिल चौहान की वापसी के पीछे CBI (NCB-India), विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय का सामूहिक प्रयास है. इसके पकड़ने के लिए तमाम कोशिशें की गईं, जो आखिरकार 2026 में पूरी हुईं-
- रेड नोटिस: हरियाणा पुलिस के अनुरोध पर सीबीआई ने इंटरपोल के माध्यम से साहिल के खिलाफ ‘रेड नोटिस’ जारी करवाया.
- लोकेशन ट्रेसिंग: बैंकॉक में उसकी गतिविधियों और लोकेशन को लगातार मॉनिटर किया गया.
- डिपोर्टेशन: थाईलैंड की सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर उसे डिपोर्ट करवाया गया और 10 अप्रैल को वह भारतीय सरजमीं पर लाया गया.
भारतपोल और अपराधियों की घर वापसी
सीबीआई अब ‘भारतपोल’ प्लेटफॉर्म के जरिए दुनिया भर में फैले भारतीय अपराधियों पर नजर रख रही है. पिछले कुछ वर्षों में 150 से अधिक भगोड़ों को वापस लाया जा चुका है. साहिल चौहान की गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि अब अपराधियों के लिए विदेश भागना सुरक्षित रास्ता नहीं रह गया है.
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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



