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खून चूसने वाली जोंक से गंजेपन का इलाज?: स्किन इंफेक्शन और मुंहासों के लिए भी जोंक थेरेपी, दावा- 1100 से ज्यादा मरीजों का सफल ट्रीटमेंट – Rajasthan News


जोंक की तरह खून चूसना….

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ये कहावत कई बार सुनी होगी, लेकिन जोंक सिर्फ खून ही नहीं चूसती। झड़ते बाल, गंजापन, स्किन इंफेक्शन, पुराने घाव सहित कई बीमारियों के इलाज में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में पारंपरिक जोंक पद्धति (Leech Therapy) आधुनिक स्किन और हेयर ट्रीटमेंट का विकल्प बनकर तेजी से उभर रही है। महंगे कॉस्मेटिक प्रोसिजर और सर्जरी के बीच यह थेरेपी कम खर्च और प्राकृतिक इलाज के रूप में लोगों को आकर्षित कर रही है। संस्थान का दावा है कि अब तक 1100 से ज्यादा मरीज इस थेरेपी से गुजर चुके हैं। अधिकांश मामलों में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

दो महीने थेरेपी से बाल झड़ना कम हुआ भास्कर रिपोर्टर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की जोंक थेरेपी यूनिट पहुंची। वहां ग्वालियर की 28 वर्षीय स्वाति से मुलाकात हुई। स्वाति थेरेपी ले रही थीं। उनके सिर पर जोंक थी। बोलीं- पिछले कुछ सालों से अचानक बाल झड़ने की समस्या बढ़ गई थी।

सिर में कई पैच बन गए थे। हेयर लॉस लगातार बढ़ रहा था। एलोपैथी समेत कई तरह की दवाइयों और इलाज के बावजूद सुधार नहीं हुआ। ऐसे में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में जोंक पद्धति से उपचार शुरू कराया।

दो महीने से थेरेपी ले रहीं स्वाति ने बताया- बालों का झड़ना काफी हद तक नियंत्रित हुआ है। जहां पहले खाली पैच बढ़ रहे थे, वहां अब नई हेयर ग्रोथ दिखाई देने लगी है। स्वाति ने बताया कि पहले उन्हें एक डॉक्टर ने हेयर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। अब बिना उसके ही सुधार महसूस हो रहा है।

ग्वालियर की स्वाति हेयर फॉल की समस्या को लेकर 2 महीने से जोंक थेरेपी ले रही हैं।

मुंहासों का इलाज किशनगढ़ निवासी 24 साल के अमजस लंबे समय से चेहरे पर गंभीर एक्ने (मुंहासों) की समस्या से परेशान थे। कई तरह की दवाइयां लेने के बावजूद उन्हें बार-बार एक्ने की प्रॉब्लम हो जाती थी। बोले- दवाइयां लेने के बाद भी बार-बार एक्ने हो जाते थे। दोस्तों ने एनआईए के बारे में बताया, इसलिए यहां आया हूं। फिलहाल मेरी थेरेपी चल रही है। मुझे उम्मीद है कि इससे फायदा मिलेगा।

अमजस ने दोस्तों की सलाह पर मुंहासों के लिए इलाज के लिए थेरेपी शुरू कराई।

अमजस ने दोस्तों की सलाह पर मुंहासों के लिए इलाज के लिए थेरेपी शुरू कराई।

इन समस्याओं के लिए कराई जा रही जोंक थेरेपी एनआईए के क्रिया शरीर विभाग के डीन डॉ. सीआर यादव के अनुसार, जोंक चिकित्सा अब गंभीर रोगों तक सीमित नहीं रही। जोंक थेरेपी त्वचा रोग, सोरायसिस, मेलास्मा/पिगमेंटेशन, एक्ने व पिंपल्स, एक्जिमा, झाइयां, त्वचा सूजन, पुराने घाव व स्किन इंफेक्शन के लिए कराई जा रही है।

इसके अलावा बालों से जुड़ी समस्याओं जैसे एलोपेसिया (पैच में बाल झड़ना), हेयर फॉल, शुरुआती गंजापन में भी जोंक थेरेपी कराई जा रही है। दावा है कि सूजन और दर्द से जुड़ी समस्याओं में भी ये कारगर है।

डॉक्टर्स का कहना है कि जोंक की लार में मौजूद प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-कोएगुलेंट तत्व ब्लड सर्कुलेशन सुधारते हैं, जिससे त्वचा और स्कैल्प को बेहतर पोषण मिलता है।

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एक मरीज पर एक ही जोंक संक्रमण रोकने के लिए संस्थान में सख्त नियम लागू हैं। एक मरीज के इलाज में एक ही जोंक का उपयोग किया जाता है। पूरी थेरेपी उसी जोंक से पूरी की जाती है। उपचार खत्म होने के बाद उसे दोबारा उपयोग नहीं किया जाता। इससे क्रॉस-इन्फेक्शन का खतरा खत्म हो जाता है।

जोंक का वैज्ञानिक रखरखाव जोंक को सुरक्षित रखने के लिए विशेष लैब जैसी व्यवस्था बनाई गई है। इसमें तापमान नियंत्रित रखा जाता है। पानी का TDS नियमित जांचा जाता है। साथ ही स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि जोंक का स्वास्थ्य ही इलाज की सफलता तय करता है।

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डेढ़ लाख तक खर्च वाले हेयर ट्रांसप्लांट का प्राकृतिक विकल्प? डीन डॉ. यादव का दावा है कि कई ऐसे मरीज आए जिन्हें हेयर ट्रांसप्लांट की सलाह दी गई थी, लेकिन जोंक थेरेपी के बाद बाल झड़ना कम हुआ और नई ग्रोथ शुरू हुई। इसी तरह स्किन रीजुवेनेशन में भी यह थेरेपी लोकप्रिय हो रही है।

बेहतर रक्त संचार के कारण त्वचा में ग्लो और सूजन में कमी देखी जा रही है, जिससे इसे प्राकृतिक एंटी-एजिंग थेरेपी माना जा रहा है। हेयर ट्रांसप्लांट का खर्च 60 हजार से डेढ़ लाख रुपए के बीच आता है। लेजर स्किन ट्रीटमेंट में हर सीटिंग के 5 हजार से 25 हजार रुपए लगते हैं। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में यह पूरी तरह फ्री है।

(नोट- खबर में मरीजों के फोटो-वीडियो उनकी सहमति से इस्तेमाल किए गए हैं।)



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