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चारमीनार से आगे… हैदराबाद की वो दुनिया जिसे बहुत कम लोग जानते हैं, देखिए फोटो


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हैदराबाद की पहचान अब सिर्फ चारमीनार और बिरयानी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यहां की झीलों के बीच बसे खूबसूरत द्वीप इसे एक अनोखा पर्यटन स्थल बनाते हैं. प्राकृतिक सुंदरता, रोमांच और ऐतिहासिक विरासत का यह संगम हर पर्यटक को आकर्षित करता है और एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है.

हैदराबाद की पहचान सिर्फ चारमीनार और बिरयानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के जलशयों के बीच बसे खूबसूरत द्वीप इसे एक खास पर्यटन केंद्र बनाते हैं. हुसैन सागर की विशाल बुद्ध प्रतिमा से लेकर नागार्जुन सागर के मिनी मालदीव और लखनावरम के झूलते पुलों तक, ये द्वीप ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं. सुकून और रोमांच की तलाश करने वाले पर्यटकों के लिए ये टापू बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं.

यल्लेश्वरगट्टू द्वीप यह द्वीप केवल नाव द्वारा पहुँचा जा सकता है और यहाँ स्थित पहाड़ियों पर ट्रेकिंग करना एक रोमांचक अनुभव है। यहाँ से नागार्जुन सागर का पैनोरमिक व्यू दिखाई देता है। इस द्वीप के पास ही प्राचीन बौद्ध सभ्यताओं के अवशेष मिले थे। पानी के बीच ऊँची पहाड़ियाँ इसे एक रहस्यमयी लुक देती हैं जिस कारण इसे अक्सर फोटोग्राफी के लिए सबसे अच्छी जगह माना जाता है।

यल्लेश्वरगट्टू द्वीप केवल नाव के जरिए ही पहुंचा जा सकता है और यहां की पहाड़ियों पर ट्रेकिंग करना एक रोमांचक अनुभव प्रदान करता है. यहां से नागार्जुन सागर का पैनोरमिक दृश्य दिखाई देता है. इस द्वीप के पास प्राचीन बौद्ध सभ्यताओं के अवशेष भी मिले हैं. पानी के बीच स्थित ऊंची पहाड़ियां इसे एक रहस्यमयी रूप देती हैं, जिसके कारण इसे अक्सर फोटोग्राफी के लिए सबसे बेहतरीन जगह माना जाता है.

लखनावरम झील के द्वीप इस विशाल झील में लगभग 13 छोटे-छोटे द्वीप फैले हुए हैं। यहाँ का 160 मीटर लंबा झूलता हुआ पुल भारत के सबसे बेहतरीन इंजीनियरिंग अजूबों में से एक है जो मुख्य भूमि को द्वीपों से जोड़ता है। तेलंगाना पर्यटन विभाग ने यहाँ कुछ द्वीपों पर वुडन कॉटेज बनाए हैं जहाँ पर्यटक पानी के बीचों-बीच रहने का अनुभव ले सकते हैं।

लखनावरम झील के द्वीप इस विशाल झील में लगभग 13 छोटे-छोटे द्वीप फैले हुए हैं. यहां का 160 मीटर लंबा झूलता हुआ पुल भारत के सबसे बेहतरीन इंजीनियरिंग अजूबों में से एक है, जो मुख्य भूमि को द्वीपों से जोड़ता है. तेलंगाना पर्यटन विभाग ने यहां कुछ द्वीपों पर वुडन कॉटेज बनाए हैं, जहां पर्यटक पानी के बीचों-बीच रहने का अनुभव ले सकते हैं.

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बुद्ध प्रतिमा द्वीप यह दुनिया की सबसे ऊँची अखंड बुद्ध प्रतिमाओं में से एक है जिसकी ऊँचाई लगभग 58 फीट है और वजन 350 टन है। इसे सफेद ग्रेनाइट के एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इस प्रतिमा को स्थापित करने का विचार 1985 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.टी. रामा राव का था। रात के समय यहाँ लेजर शो और रंग-बिरंगी लाइटें इस द्वीप को जादुई बना देती हैं। लुम्बिनी पार्क से चलने वाली मोटर बोट और स्पीड बोट पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।

बुद्ध प्रतिमा द्वीप पर स्थित यह दुनिया की सबसे ऊंची अखंड बुद्ध प्रतिमाओं में से एक है, जिसकी ऊंचाई लगभग 58 फीट और वजन 350 टन है. इसे सफेद ग्रेनाइट के एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है. इस प्रतिमा को स्थापित करने का विचार 1985 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.टी. रामा राव का था. रात के समय यहां लेजर शो और रंग-बिरंगी लाइटें इस द्वीप को जादुई बना देती हैं. लुम्बिनी पार्क से चलने वाली मोटर बोट और स्पीड बोट पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं.

बर्ड्स आइलैंड इसे सीक्रेट लेक के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह पहाड़ियों के बीच छिपा हुआ है। यहाँ का द्वीप विशेष रूप से पेलिकन और पेंटेड स्टॉर्क जैसे पक्षियों के लिए प्रजनन स्थल है। दुर्गम चेरुवू पर बने नए केबल-स्टेयड ब्रिज के कारण अब इस द्वीप का दृश्य रात में बेहद आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का लगता है।यहाँ द्वीप के आसपास कयाकिंग और बोटिंग की सुविधा उपलब्ध है जो प्रकृति प्रेमियों को शांति का अनुभव कराती है

बर्ड्स आइलैंड को सीक्रेट लेक के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह पहाड़ियों के बीच छिपा हुआ है. यह द्वीप विशेष रूप से पेलिकन और पेंटेड स्टॉर्क जैसे पक्षियों के लिए प्रजनन स्थल है. दुर्गम चेरुवू पर बने नए केबल-स्टेयड ब्रिज के कारण अब इस द्वीप का दृश्य रात में बेहद आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का लगता है. यहां द्वीप के आसपास कयाकिंग और बोटिंग की सुविधा उपलब्ध है, जो प्रकृति प्रेमियों को शांति का अनुभव कराती है.

उस्मान सागर और हिमायत सागर इन झीलों का निर्माण 1920 के दशक में हैदराबाद को बाढ़ से बचाने और पीने के पानी की आपूर्ति के लिए मीर उस्मान अली खान के शासनकाल में किया गया था मानसून के बाद जब पानी थोड़ा कम होता है, तो उभरने वाले टापू फ्लेमिंगो और अन्य प्रवासी पक्षियों के अस्थायी घर बन जाते हैं।

उस्मान सागर और हिमायत सागर का निर्माण 1920 के दशक में हैदराबाद को बाढ़ से बचाने और पीने के पानी की आपूर्ति के लिए मीर उस्मान अली खान के शासनकाल में किया गया था. मानसून के बाद जब पानी थोड़ा कम होता है, तो उभरने वाले टापू फ्लेमिंगो और अन्य प्रवासी पक्षियों के अस्थायी घर बन जाते हैं.



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