पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत के वित्तीय बाजारों को बुरी तरह झकझोर दिया है और अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। सोमवार को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण भारतीय इक्विटी और मुद्रा (करेंसी) बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। इस संकट ने निवेशकों के करीब 12 लाख करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए हैं। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, भारत इस समय एक ‘तिहरे प्रहार’- महंगा कच्चा तेल, गिरते रुपये और शेयर बाजार में गिरावट का सामना कर रहा है।
आइए समझते हैं कि यह संकट क्यों पैदा हुआ है और इसका आपकी जेब व देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है।
शेयर बाजार में अचानक इतनी बड़ी गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
पश्चिम एशिया में ईरान-इस्राइल-अमेरिका युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का भारी डर पैदा हो गया है। इस दहशत के कारण सोमवार को सेंसेक्स 2,400 अंकों का गोता लगा गया, जबकि निफ्टी करीब 3% टूटकर 24,028.05 के स्तर पर आ गया। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) तेजी से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों (जैसे डॉलर) की ओर भाग रहे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली की सुनामी आ गई। हालांकि बाजार बंद होते समय सेंसेक्स और निफ्टी अपने निचले स्तरों से संभलकर बंद हुए।