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जन विश्वास बिल: कानून बनते ही 1000+ कृत्य अपराध के दायरे से बाहर होंगे, नागरिकों के जीवन को आसान बनाने पर जोर


केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक को अभूतपूर्व सुधार बताते हुए कहा कि इस पैमाने पर बदलाव का उदाहरण न तो भारत में पहले देखा गया है और न ही दुनिया में कहीं और। उन्होंने बताया कि एक साथ 79 संसदीय अधिनियमों के करीब 1,000 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिनमें आजादी के पहले के छह कानून भी शामिल हैं।

विधेयक संसद से हुआ पारित

संसद ने गुरुवार को जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार ने विभिन्न कानूनों में मौजूद कई आपराधिक प्रावधानों को खत्म कर उन्हें सरल और तर्कसंगत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य कारोबार सुगमता और आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है।

यह विधेयक पहले लाए गए जन विश्वास विधेयक, 2025 का विस्तारित रूप है। शुरुआत में इसमें 17 कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव था, लेकिन सेलेक्ट कमेटी की सिफारिशों के बाद इसका दायरा काफी बढ़ा दिया गया।

जन विश्वास बिल 2026: अपराध-मुक्ति के प्रमुख प्रावधान 


  • छोटे उल्लंघनों पर राहत: मामूली या तकनीकी गलतियों के लिए अब जेल की सजा नहीं होगी। ऐसे मामलों को आपराधिक अपराध के बजाय प्रशासनिक उल्लंघन माना जाएगा।

  • सार्वजनिक स्थानों से जुड़े नियम: मेट्रो में धूम्रपान, सड़क संकेतों को नुकसान पहुंचाना या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने जैसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने के बजाय जुर्माना लगाया जाएगा।

  • व्यापार और अनुपालन में सुधार: ड्रग्स और कॉस्मेटिक कानून के तहत कुछ मानकों के उल्लंघन पर पहले जहां जेल का प्रावधान था, अब उसकी जगह एक लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

  • परिवहन नियमों में बदलाव: बिना बीमा के वाहन चलाने जैसे मामलों में भी कई स्थितियों में जेल के बजाय जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

  • श्रम कानूनों में नरमी: एप्रेंटिस एक्ट, 1961 के तहत पहले या दूसरे उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जगह केवल चेतावनी या सलाह दी जाएगी।

  • सजा से ज्यादा भरोसा: इस बिल का मूल उद्देश्य दंडात्मक व्यवस्था से हटकर भरोसे पर आधारित शासन को बढ़ावा देना है, जिससे व्यवसाय करने में आसानी हो और अदालतों पर अनावश्यक बोझ भी कम हो।

जेल की सजा की जगह जुर्माना

विधेयक की प्रमुख विशेषता यह है कि कई छोटे अपराधों में जेल की सजा को हटाकर मौद्रिक दंड (पेनल्टी) का प्रावधान किया गया है। सरकार पहले ही 183 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर चुकी है। नए कानून के तहत मामूली उल्लंघनों पर चेतावनी, सुधार नोटिस या जुर्माना लगाया जाएगा, जिससे अदालतों पर बोझ भी कम होगा।



गोयल ने बताया कि देश में ऐसे प्रावधानों के तहत पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें अधिकांश मामूली उल्लंघन से जुड़े हैं। अब अधिकारियों को सीधे पेनल्टी लगाने का अधिकार मिलेगा, जिससे लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।

ग्रेडेड एक्शन और गंभीर अपराध यथावत

विधेयक में चरणबद्ध कार्रवाई (ग्रेडेड एनफोर्समेंट) का प्रावधान है पहले सलाह, फिर चेतावनी और दोहराव पर बढ़ती पेनल्टी। हालांकि, गंभीर अपराधों को इसमें शामिल नहीं किया गया है और उनके लिए कड़े प्रावधान पहले जैसे ही रहेंगे।

औपनिवेशिक सोच से बदलाव की ओर

गोयल ने कहा कि यह सुधार औपनिवेशिक मानसिकता वाले कानूनों से आगे बढ़ने का प्रयास है, जहां दंड को प्राथमिकता दी जाती थी। अब सरकार का फोकस भरोसे पर आधारित शासन पर है, जिसमें ईमानदार नागरिकों और व्यवसायों को अनावश्यक कानूनी दबाव से राहत मिलेगी।

अन्य प्रमुख प्रावधान

विधेयक के तहत विभिन्न कानूनों में जुर्माने की राशि संशोधित की गई है और हर तीन साल में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान जोड़ा गया है। साथ ही, विवादों के निपटारे के लिए निर्णायक और अपीलीय प्राधिकरण बनाए जाएंगे। कुछ मामूली अपराधों जैसे झूठा फायर अलार्म या जन्म-मृत्यु की सूचना न देना को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे निवेश, व्यापार और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।



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