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डॉ. प्रीति अडानी के नेतृत्व में ‘स्वाभिमान’ का बड़ा विस्तार, पूरे भारत में 10 लाख महिला उद्यमियों को समर्थन


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oi-Divyansh Rastogi

Adani Foundation Swabhiman Program: अडानी फाउंडेशन ने अपने महिला सशक्तिकरण अभियान ‘स्वाभिमान’ को बड़े स्तर पर विस्तार देने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य अब पूरे भारत में 10 लाख महिला उद्यमियों को सशक्त बनाना है, ताकि महिलाएं अपने छोटे कारोबार शुरू कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

इस विस्तार की घोषणा मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स में आयोजित कार्यक्रम ‘स्वाभिमान – द राइज़ ऑफ शी’ के दौरान की गई। इस कार्यक्रम में अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी और ट्रस्टी शिलिन अडानी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं।

Adani Foundation Swabhiman Program

स्वाभिमान कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं बल्कि उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाना है। इसके तहत महिलाओं को कौशल विकास, उद्यमिता प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही उन्हें बाजार से जोड़ने में भी मदद की जाती है ताकि वे अपने उत्पादों को आसानी से बेच सकें।

इस राष्ट्रीय विस्तार की शुरुआत महाराष्ट्र से होगी। पहले चरण में योजना है कि एक साल के भीतर राज्य में करीब एक लाख महिलाओं को इस कार्यक्रम से जोड़ा जाए। इसके जरिए महिला नेतृत्व वाले छोटे कारोबारों और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

यह पहल महिला आर्थिक विकास महामंडल के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत लागू की जा रही है। महिला आर्थिक विकास महामंडल महाराष्ट्र सरकार की वह प्रमुख एजेंसी है जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वयं सहायता समूहों के विकास पर काम करती है।

अब तक इस कार्यक्रम के जरिए मुंबई के वंचित समुदायों की 4,500 से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से कई महिलाओं ने छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं और अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए एक खास पहल ‘स्वतेजा मार्ट’ का भी उद्घाटन किया गया। यह एक सामुदायिक बाजार है, जहां महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए मंच मिलेगा। यहां ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से बिक्री की सुविधा दी जाएगी ताकि महिलाओं के कारोबार को ज्यादा ग्राहक मिल सकें।

इसी पहल के तहत एक क्लाउड किचन की भी शुरुआत की गई है, जिससे महिलाओं को फूड बिजनेस में अवसर मिल सकें। इससे वे घर से ही अपना काम शुरू कर सकती हैं और आय का नया स्रोत बना सकती हैं।

इस मौके पर स्वाभिमान कार्यक्रम से जुड़े बदलावों की कहानियों को समेटते हुए एक कॉफी टेबल बुक का भी अनावरण किया गया। इस पहल के जरिए मुंबई में अब तक 800 से ज्यादा महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो यह दिखाता है कि सही प्रशिक्षण और सहयोग मिलने पर महिलाएं कितनी तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं।

महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि यह कार्यक्रम महिलाओं की वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उनके मुताबिक ऐसी पहलें सरकार की महिला आर्थिक सशक्तिकरण योजनाओं को भी मजबूत करती हैं।

मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शहर में महिलाओं की बढ़ती उद्यमिता एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि धारावी जैसे इलाकों में भी महिलाएं अब छोटे कारोबार शुरू कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

डॉ. प्रीति अडानी ने इस मौके पर कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना किसी भी समाज को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी तरीका है। उनके मुताबिक जब महिलाओं को सही प्रशिक्षण, वित्तीय जानकारी और बाजार तक पहुंच मिलती है तो वे न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे समुदाय के विकास में योगदान देती हैं।

स्वाभिमान कार्यक्रम के तहत महिलाओं को उद्यमिता, वित्तीय प्रबंधन और आजीविका से जुड़े कौशल की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही उन्हें मेंटरशिप, बाजार से जुड़ने के अवसर और कारोबार शुरू करने में मार्गदर्शन भी दिया जाता है।

आज कई महिलाएं घर से छोटे व्यवसाय चला रही हैं या सामूहिक उद्यम शुरू कर चुकी हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं।

अडानी फाउंडेशन इस समय शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, जलवायु परिवर्तन और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है। फाउंडेशन की पहलें देश के 22 राज्यों के 7,000 से ज्यादा गांवों में पहुंच चुकी हैं और करीब 9.6 मिलियन लोगों को लाभ मिल रहा है।

स्वाभिमान कार्यक्रम के राष्ट्रीय विस्तार के साथ उम्मीद की जा रही है कि यह आने वाले समय में भारत के सबसे बड़े महिला उद्यमिता आंदोलनों में से एक बन सकता है, जहां महिलाएं सिर्फ रोजगार पाने वाली नहीं बल्कि नए अवसर पैदा करने वाली उद्यमी बनकर सामने आएंगी।



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