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थार, मौत और 5000000 रुपए! पत्नी ने फिल्म ‘दृश्यम’ से भी खतरनाक खेल खेला, पुलिस भी थी सात


न्यूज18 मराठी
जलगांव:
महाराष्ट्र के जलगांव जिले से एक ऐसी साजिश का खुलासा हुआ है जिसने पुलिस और बीमा कंपनियों को भी चौंका दिया. कहानी किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म जैसी लगती है. एक मौत. एक दुर्घटना. एक काली थार. और 50 लाख रुपए का बीमा. लेकिन जांच शुरू हुई तो पूरा मामला उल्टा निकल आया. जिस व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत बताई गई थी, वह दरअसल करीब एक साल पहले ही बीमारी से मर चुका था. इसके बाद उसकी मौत को सड़क हादसे का रूप देकर बीमा कंपनी से 50 लाख रुपए हड़पने की योजना बनाई गई.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल की मास्टरमाइंड खुद मृतक की पत्नी बताई जा रही है. पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि पत्नी, बीमा एजेंट, डॉक्टर और पुलिसकर्मी तक इस साजिश का हिस्सा बने. आरोप है कि फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर बीमा क्लेम हासिल करने की कोशिश की गई. इतना ही नहीं, मृतक के नाम पर कई बीमा पॉलिसियां भी थीं. जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने कुल मिलाकर करीब 75 लाख रुपए तक की बीमा रकम हड़पने की योजना बनाई थी.

बीमा क्लेम और पुलिस जांच में खुला पूरा राज

पुलिस के अनुसार, जलगांव जिले के चालीसगांव तालुका के दहीवाड़ फाटा इलाके में एक मोटरसाइकिल दुर्घटना का मामला दर्ज कराया गया था. दावा किया गया कि 19 अप्रैल 2025 की रात एक काली थार गाड़ी ने राजेंद्र जाधव की बाइक को टक्कर मार दी. गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें चालीसगांव ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

  • इस घटना के आधार पर मृतक की पत्नी अरुणा जाधव ने श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 50 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा क्लेम दाखिल किया. मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी पेश की गई. लेकिन जब बीमा कंपनी ने मामले की गहराई से जांच करवाई, तो कई सवाल खड़े हो गए. जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति की दुर्घटना में मौत बताई गई, उसकी असल मौत करीब एक साल पहले बीमारी से हो चुकी थी.
  • इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की. जांच में खुलासा हुआ कि इस साजिश में मृतक की पत्नी अरुणा जाधव, बीमा एजेंट, मृतक का भाई, डॉक्टर और चार पुलिसकर्मी भी शामिल थे. पुलिस ने इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है.

इस पूरे बीमा घोटाले की साजिश किसने रची?

पुलिस जांच के अनुसार इस साजिश की मुख्य आरोपी मृतक की पत्नी अरुणा जाधव है. उसने बीमा एजेंट प्रवीण पाटिल, प्रेम पाटिल और अपने देवर मिथुन जाधव के साथ मिलकर यह योजना बनाई थी. मकसद था फर्जी सड़क दुर्घटना दिखाकर 50 लाख रुपए की बीमा राशि हासिल करना.

पुलिस और डॉक्टर इस साजिश में कैसे शामिल हुए?

जांच में सामने आया कि चालीसगांव ग्रामीण अस्पताल के एक डॉक्टर और मेहुनबारे पुलिस स्टेशन के चार पुलिसकर्मी भी इस मामले में शामिल थे. आरोप है कि उन्होंने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार करने में मदद की, इससे दुर्घटना की कहानी को सच साबित किया जा सके.

इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?

अब तक कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें मृतक की पत्नी, बीमा एजेंट, डॉक्टर, पुलिसकर्मी और परिवार के सदस्य शामिल हैं. पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले की आगे जांच जारी है.

क्या यह किसी बड़े बीमा धोखाधड़ी गिरोह का हिस्सा हो सकता है?

पुलिस को शक है कि यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं है. जांच में पता चला है कि अलग-अलग बीमा कंपनियों से करीब 75 लाख रुपए तक का क्लेम करने की कोशिश की गई थी. इससे संकेत मिलता है कि इसके पीछे एक संगठित बीमा धोखाधड़ी गिरोह सक्रिय हो सकता है.

बीमा धोखाधड़ी गिरोह का शक

जलगांव पुलिस का मानना है कि इस घटना से बीमा धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है. मृतक के नाम पर कई बीमा पॉलिसियां होने और अलग-अलग कंपनियों से क्लेम की कोशिशों ने जांच एजेंसियों को सतर्क कर दिया है. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य संभावित मामलों की भी जांच कर रही है.



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