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oi-Pallavi Kumari
Ali Khamenei Son Mojtaba Khamenei Impotency: ईरान की सत्ता के सबसे ताकतवर परिवार से जुड़ा एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को कभी नपुंसकता की समस्या से जूझना पड़ा था।
यही वजह थी कि उन्हें इलाज के लिए कई बार ब्रिटेन जाना पड़ा। यह दावा विकीलीक्स (WikiLeaks documents) द्वारा जारी अमेरिकी कूटनीतिक दस्तावेजों में किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इन खुलासों के बीच मोजतबा खामेनेई को ईरान के अगले सुप्रीम लीडर के संभावित उम्मीदवार के रूप में भी देखा जा रहा है।

अमेरिकी विदेश विभाग की एक गोपनीय रिपोर्ट, जिसे बाद में विकीलीक्स ने सार्वजनिक किया, उसमें दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई को संतान ( होने में दिक्कत आ रही थी। परिवार की ओर से उन पर जल्द बच्चे पैदा करने का दबाव था। रिपोर्ट के मुताबिक, इलाज के लिए उन्हें कम से कम चार बार ब्रिटेन के अस्पतालों में जाना पड़ा। इनमें से एक बार वे करीब दो महीने तक लंदन में अस्पताल में भर्ती रहे। इलाज के बाद उनकी पत्नी गर्भवती हुईं और बाद में एक बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम अली रखा गया।
लंदन के अस्पतालों में कराया गया मोजतबा खामेनेई का इलाज
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई ने लंदन के वेलिंगटन और क्रॉमवेल अस्पतालों में कई बार इलाज कराया। बताया गया कि चौथी बार ब्रिटेन में दो महीने तक चले इलाज के बाद उनकी समस्या दूर हो गई और उनकी पत्नी गर्भवती हो गईं। दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि मोजतबा के परिवार को उनसे जल्द वारिस की उम्मीद थी, इसलिए उन्हें बार-बार विदेश जाकर इलाज कराना पड़ा।
दो अस्थायी विवाह के बाद हुई स्थायी शादी और फिर बेटा (Mojtaba Khamenei Temporary Marriages)
- रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि मोजतबा खामेनेई ने स्थायी विवाह से पहले दो अस्थायी विवाह किए थे। इस्लामी कानून में इस तरह के अस्थायी विवाह की अनुमति है। यानी दो अस्थायी विवाह में रहने के बाद उन्हें अपनी समस्या के बारे में पता चला था।
- बाद में उन्होंने ईरान की संसद के पूर्व अध्यक्ष गुलाम अली हदाद आदेल की बेटी जहरा हदाद आदेल से शादी की। शादी के कुछ समय बाद संतान को लेकर परेशानी सामने आई और फिर उन्हें इलाज के लिए ब्रिटेन जाना पड़ा। खुफिया सूत्रों के मुताबिक दोनों की शादी 2004 में हुई थी। बताया जाता है कि यह शादी उस समय हुई जब मोजतबा की नपुंसकता की समस्या के इलाज के लिए उन्हें तीन बार ब्रिटेन जाना पड़ा था। विकीलीक्स के दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि मोजतबा खामेनेई लंदन के वेलिंगटन और क्रॉमवेल अस्पतालों में इलाज कराने गए थे।
- अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से 2008 में लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास को भेजे गए एक गोपनीय ब्रीफिंग दस्तावेज में बताया गया था कि मोजतबा खामेनेई पर परिवार की ओर से जल्द संतान पैदा करने का दबाव था। इसी कारण उन्हें इलाज के लिए चार बार अस्पताल जाना पड़ा।
- दस्तावेज के मुताबिक, उनकी अंतिम यात्रा करीब दो महीने तक चली थी। इसके बाद उनकी पत्नी गर्भवती हो गईं। इस दंपति का एक बेटा है जिसका नाम अली रखा गया है।
दो महीने की इलाज के बाद पत्नी हुई गर्भवती
- एक कूटनीतिक संदेश में कहा गया है कि परिवार चाहता था कि मोजतबा जल्द संतान पैदा करें, लेकिन इसके लिए उन्हें चौथी बार भी ब्रिटेन जाकर इलाज कराना पड़ा। दो महीने के इलाज के बाद उनकी पत्नी गर्भवती हुईं और बाद में ईरान में एक स्वस्थ बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम उनके दादा के नाम पर अली रखा गया।
- विकीलीक्स के खुलासे में यह भी कहा गया है कि जहरा हदाद आदेल से शादी से पहले मोजतबा के दो अस्थायी विवाह भी हुए थे, जिन्हें इस्लामी कानून में अनुमति दी जाती है।
- हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, हालिया हवाई हमलों में मोजतबा की पत्नी और बेटे भी उन 49 लोगों में शामिल थे जिनकी मौत हुई है। अब अली खामेनेई के उत्तराधिकारी का फैसला ईरान की शक्तिशाली धार्मिक संस्था “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” को करना है। इस संस्था के सदस्य अहमद खातमी ने ईरानी सरकारी मीडिया से कहा है कि नए सुप्रीम लीडर के चयन के लिए जल्द मतदान कराया जा सकता है।
- सुप्रीम लीडर की दौड़ में मोजतबा खामेनेई के अलावा अलीरेजा अराफी, कट्टरपंथी नेता मोहसिन अराकी और 1979 की इस्लामी क्रांति के संस्थापक आयतुल्लाह रुहोल्लाह खोमेनी के पोते हसन खोमेनी के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई? (Who is Mojtaba Khamenei)
मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। उनका बचपन उस दौर में बीता जब उनके पिता शाह के खिलाफ आंदोलन का हिस्सा थे और 1979 की इस्लामी क्रांति ने ईरान की राजनीति पूरी तरह बदल दी थी।
उन्होंने तेहरान के अलावी हाई स्कूल में पढ़ाई की और बाद में कोम के धार्मिक मदरसों में इस्लामी शिक्षा हासिल की। यहां उन्होंने कट्टरपंथी धार्मिक विद्वानों के अधीन अध्ययन किया।
हालांकि, लंबे समय से धार्मिक संस्थानों से जुड़े रहने के बावजूद उन्हें अब तक आयतुल्लाह का दर्जा नहीं मिला है।
सत्ता के गलियारों में मजबूत पकड़ (Influence in Iran Power Structure)
मोजतबा खामेनेई ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही कोई औपचारिक सरकारी पद संभाला। इसके बावजूद उन्हें लंबे समय से ईरान की सत्ता के अंदर बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने हबीब बटालियन में सेवा दी थी और उसी दौरान उन्होंने सुरक्षा और खुफिया तंत्र से जुड़े कई अधिकारियों के साथ मजबूत संबंध बनाए। विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ उनके करीबी रिश्ते उन्हें सत्ता के समीकरण में बेहद मजबूत बनाते हैं। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ उन्हें अपने पिता का संभावित उत्तराधिकारी भी मानते रहे हैं।
अमेरिका ने लगाया था प्रतिबंध (US Sanctions)
अमेरिका ने 2019 में मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा था कि वे अपने पिता के प्रतिनिधि के रूप में काम करते थे और सत्ता से जुड़े कई फैसलों में उनकी भूमिका होती थी। दावा किया गया था कि अली खामेनेई ने अपने कुछ अधिकार भी उन्हें सौंप रखे थे, जबकि उनके पास कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं था।
अगला सुप्रीम लीडर कौन? (Iran Supreme Leader Successor)
ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव देश की शक्तिशाली धार्मिक संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ करती है। हाल ही में इस संस्था के कुछ सदस्यों ने संकेत दिया है कि नया सुप्रीम लीडर जल्द चुना जा सकता है।
मोजतबा खामेनेई के अलावा अलीरेज़ा अराफी, मोहसिन अराकी और हसन खोमेनी जैसे नाम भी इस पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर मोजतबा खामेनेई को शीर्ष पद के लिए चुना जाता है तो ईरान की राजनीति में वंशवादी सत्ता को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है।
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