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पश्चिम एशिया में तनाव का असर: कच्चे तेल के बाद अब गैस की कीमतों में 130% उछाल की चेतावनी, जानिए क्या अपडेट


पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण युद्ध का असर अब केवल शेयर बाजार और कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। ‘गोल्डमैन सैक्स’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण एशिया और यूरोप में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कच्चे तेल के बाद अब यह नया गैस संकट क्यों पैदा हुआ है और इसके क्या मायने हैं।

गैस संकट का मुख्य कारण क्या है?

इस पूरे संकट की जड़ ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ है, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया भर का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। हालांकि यह रास्ता अभी आधिकारिक रूप से बंद नहीं हुआ है, लेकिन प्रमुख शिपिंग कंपनियों, और तेल व गैस कंपनियों ने सुरक्षा को देखते हुए यहां से अपने जहाजों की आवाजाही रोक दी है। ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, इस क्षेत्र में कम से कम एक दर्जन खाली टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया है। 

गोल्डमैन सैक्स की चेतावनी-130% तक बढ़ेगा दाम

गैस की सप्लाई रुकने के कारण बाजार में घबराहट का माहौल है। इसके प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:


  • कीमतों में बेतहाशा वृद्धि: गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से गैस का निर्यात एक महीने के लिए भी रुकता है, तो एशिया में एलएनजी की कीमत 130% उछलकर 25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच सकती है। 

  • कतर और यूएई की सप्लाई पर ब्रेक: कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक देश है, जो वैश्विक गैस सप्लाई का 20% हिस्सा अकेले देता है। कतर का सारा गैस निर्यात होर्मुज के रास्ते ही होता है। रास्ता बाधित होने से कतर और यूएई की गैस सप्लाई में भारी देरी हो रही है।

अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर असर


आईएनजी के कमोडिटी रणनीतिकारों (जैसे वॉरेन पैटरसन) का कहना है कि गैस सप्लाई रुकने का असली और सबसे बड़ा असर यूरोप और एशिया के गैस बाजारों पर ही पड़ेगा। स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इस्राइल ने भी युद्ध के कारण अपने समुद्री (ऑफशोर) गैस क्षेत्रों से गैस का उत्पादन कम कर दिया है। यद्यपि अमेरिका अपनी गैस निर्यात क्षमता बढ़ा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों से होने वाले नुकसान की तुरंत भरपाई करने के लिए अमेरिकी सप्लाई पर्याप्त नहीं होगी। 



शेयर बाजार में आई गिरावट के बीच कच्चे तेल और अब प्राकृतिक गैस की सप्लाई रुकना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा ‘डबल अटैक’ है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता जल्द सुरक्षित नहीं हुआ, तो दुनिया भर में गैस और बिजली महंगी हो सकती है, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई दर फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच सकती है।



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