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पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत सरकार का बड़ा कदम: संकट से जूझ रहे निर्यातकों को 497 करोड़ रुपये का राहत पैकेज


भारत सरकार ईरान युद्ध के कारण चुनौतियां झेल रहे निर्यातकों को 497 करोड़ रुपये का राहत पैकेज देगी। इसके लिए वाणिज्य मंत्रालय ने रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना शुरू की। इसका लाभ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, कुवैत, ओमान, ईरान, इस्राइल, यमन, सऊदी अरब, बहरीन व ईराक सामान भेज रहे निर्यातकों या वहां से होकर गुजरने वाली खेप पर मिलेगा।

निर्यातकों को नई खेप भेजने के लिए 95 फीसदी बीमा कवरेज मिलेगा। इसके अलावा भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) के दायरे से बाहर वाले निर्यातकों को अतिरिक्त माल भाड़े व बीमा लागत का 50 फीसदी तक प्रतिपूर्ति होगी। सरकार ने ईसीजीसी निगम को सत्यापन, दावा प्रसंस्करण, वितरण और निगरानी व निर्यात ऋण जोखिम कवर प्रदान करने का जिम्मा सौंपा है।

17-18 क्षेत्रों के निर्यातकों को मिलेगी मदद

सरकार ने ईरान युद्ध के कारण चुनौतियां झेल रहे देश के निर्यातकों को राहत देने के लिए बृहस्पतिवार को 497 करोड़ रुपये के खर्च वाली रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना शुरू की। वाणिज्य मंत्रालय में सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत यह नई योजना विशेष रूप से उन 17-18 भौगोलिक क्षेत्रों के निर्यातकों पर केंद्रित है, जो संघर्ष से प्रभावित हुए हैं।

इसका मकसद उनकी चुनौतियों को कम करना है। सचिव ने बताया, भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) को कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में नियुक्त करते हुए राहत योजना के तहत पैकेज में निर्यात दायित्वों का स्वचालित विस्तार, लॉजिस्टिक संबंधी सहायता और खेप में देरी को प्रबंधित करने के लिए संभावित वित्तीय उपाय शामिल किए गए हैं। 

इन निर्यातकों को मिलेगी राहत

यह योजना मुख्य रूप से उन खेप पर लागू होगी, जिनकी आपूर्ति संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इस्राइल और यमन जैसे देशों से होती है या जो वहां से होकर गुजरते हैं। सचिव ने बताया, विभिन्न सरकारी विभागों को मिलाकर एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया गया है। यह माल ढुलाई की स्थिति के आधार पर बदलते हालात के आकलन के लिए प्रतिदिन बैठक करेगा।

निर्यातकों को तीन तरह से मिलेगी मदद

इस योजना के तीन प्रमुख हिस्से हैं। पहले हिस्से के तहत निर्यात दायित्व विस्तार शामिल है। अग्रिम अनुमति और ईपीसीजी अनुमति (जो एक मार्च से 31 मई, 2026 के बीच देय हैं) का स्वतः विस्तार 31 अगस्त तक बिना किसी जुर्माने के किया जाएगा। यह 14 फरवरी से 15 मार्च तक की तत्काल एक माह की अवधि में ईसीजीसी के जरिये पहले से बीमित खेपों की सुरक्षा करता है। दूसरे हिस्से का उद्देश्य 16 मार्च से 15 जून तक तीन माह की अवधि में आगामी निर्यात खेपों के लिए ईसीजीसी कवरेज को प्रोत्साहित करना और सुगम बनाना है।

तीसरा हिस्सा विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) को अधिभार के झटकों से बचाने के लिए बनाया गया है। यह 14 फरवरी से 14 मार्च तक एक महीने की अवधि में असाधारण ढुलाई और बीमा लागत की आंशिक प्रतिपूर्ति करता है। यह उन एमएसएमई निर्यातकों पर लागू होता है, जिन्होंने ईसीजीसी कवरेज नहीं लिया है।

ऊर्जा से जुड़ीं जानकारियां गोपनीयता के दायरे से बाहर

दूसरी ओर पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने ऊर्जा से जुड़ी जानकारियों को गोपनीयता के दायरे से बाहर कर दिया है। ऊर्जा डाटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के रूप में वर्गीकृत करने से अब तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़ी सभी इकाइयों को उत्पादन से लेकर आयात तक की विस्तृत परिचालन जानकारी देना जरूरी होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत यह आदेश जारी किया है। आदेश सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की रिफाइनरियों, एलएनजी आयातकों, पाइपलाइन संचालकों, शहरी गैस वितरकों और पेट्रो रसायन कंपनियों पर लागू होगा।  

सरकार ने यह कदम गैस और एलपीजी आपूर्ति बाधित होने के बाद ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ने के बीच उठाया है। आदेश का मकसद आपूर्ति संबंधी बाधाओं पर त्वरित कदम उठाने, बिजली, उर्वरक और घरेलू एलपीजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देना है। ब्यूरो

आदेश में यह: पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से 18 मार्च को आदेश के अनुसार, सार्वजनिक से लेकर निजी क्षेत्रों की तेल व गैस कंपनियों को उत्पादन, आयात, भंडार स्तर और खपत से संबंधित आंकड़े और जानकारियां देना अनिवार्य होगा। इससे भारत की आपूर्ति शृंखला की निगरानी करने, बचे भंडार का प्रबंधन करने और वैश्विक झटकों का जोखिम को कम करने की क्षमता मजबूत होगी।



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