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oi-Sumit Jha
US Iran Ceasefire: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम होने के बाद पाकिस्तान खुद को दुनिया के सामने एक बड़े शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है। पाकिस्तान को गर्व है कि दोनों देशों की शांति वार्ता उसके यहां हो रही है और प्रतिनिधिमंडल भी पहुंच चुके हैं। लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट ने पाकिस्तान की इस खुशी पर पानी फेर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, शहबाज शरीफ का सोशल मीडिया पोस्ट असल में व्हाइट हाउस द्वारा ही पास किया गया था।
इस खुलासे के बाद लोग कह रहे हैं कि पाकिस्तान केवल एक जरिया था, जबकि असली खेल अमेरिका ही खेल रहा था। पाकिस्तान की इस ‘फजीहत’ ने साबित कर दिया कि वह केवल पर्दे के सामने दिखने वाला चेहरा था।

व्हाइट हाउस की ‘मंजूरी’ और पाकिस्तान की साख
रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि शहबाज शरीफ ने जो पोस्ट ‘एक्स’ पर किया, वह पूरी तरह से अमेरिका की देखरेख में तैयार हुआ था। पाकिस्तान भले ही क्रेडिट ले रहा हो, लेकिन दुनिया अब इसे एक ‘लिखी-लिखाई स्क्रिप्ट’ मान रही है। इससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को धक्का लगा है, क्योंकि ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान एक स्वतंत्र मध्यस्थ के बजाय केवल अमेरिका के निर्देशों का पालन कर रहा था।
Shahbaz Sharif Twitter Post: ‘कॉपी-पेस्ट’ वाली गलती से खुली पोल
पाकिस्तान की सबसे ज्यादा किरकिरी उस वक्त हुई जब शहबाज शरीफ के पोस्ट के साथ ‘Draft’ लिखा हुआ शब्द भी पब्लिक हो गया। इस छोटी सी तकनीकी चूक ने यह राज खोल दिया कि यह संदेश पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने नहीं, बल्कि कहीं और से आया था। सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तान का मजाक उड़ा रहे हैं कि उन्होंने शांति की अपील वाला मैसेज भी खुद से नहीं लिखा और बिना चेक किए ड्राफ्ट कॉपी कर दिया।
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White House Scripted Post: ट्रंप की रणनीति और पाकिस्तान का इस्तेमाल
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कड़ी धमकी दी थी, लेकिन साथ ही वे कूटनीतिक रास्ता भी चाहते थे। इस खेल में पाकिस्तान एक सुविधाजनक मोहरा साबित हुआ। ट्रंप ने शरीफ के पोस्ट के तुरंत बाद युद्धविराम का ऐलान करके यह दिखाया कि वे दुनिया की सुन रहे हैं, जबकि असल में सब कुछ पहले से तय था। पाकिस्तान खुद को इस डील का हीरो बता रहा है, लेकिन हकीकत में वह केवल एक पोस्टमैन की भूमिका निभा रहा था।
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शांति वार्ता और आगे की राह
अब जबकि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि पाकिस्तान पहुंच चुके हैं, दुनिया की नज़रें इस्लामाबाद पर हैं। हालांकि पाकिस्तान इस मौके को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहा है, लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स के खुलासे ने उसकी मेहनत को विवादों में डाल दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या पाकिस्तान वाकई इस बातचीत को किसी ठोस नतीजे तक पहुंचा पाता है या फिर वह आगे भी केवल बड़ी शक्तियों के निर्देशों पर काम करेगा।



