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फ्रांस में गूंजेगा भारत का नाम! ‘एवियन समिट’ में शामिल होंगे PM Modi, G7 बैठक में जयशंकर-बैरो की बड़ी बातचीत


India

oi-Kumari Sunidhi Raj

PM Modi Evian Summit Visit: फ्रांस में आयोजित G7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत और फ्रांस के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके फ्रांसीसी समकक्ष जीन-नोएल बैरो ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य, चरमराती वैश्विक अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व के बिगड़ते हालातों पर गहन मंथन किया।

इस मुलाकात की सबसे बड़ी खबर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी (PM Narendra Modi) की आगामी फ्रांस यात्रा को लेकर आई है। यह पुष्टि हो गई है कि पीएम मोदी 15 से 17 जून तक होने वाले एवियन समिट में हिस्सा लेंगे। G7 का सदस्य न होने के बावजूद भारत को मिला यह विशेष निमंत्रण वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती धमक और रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है। यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक नीति-निर्माण में भारत की भागीदारी को भी और सशक्त करेगा।

PM Modi Evian Summit Visit

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की भूमिका

जी7 जैसे प्रतिष्ठित मंच पर भारत की मौजूदगी को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ काफी अहम मान रहे हैं। हालांकि भारत इस समूह का हिस्सा नहीं है, लेकिन एक ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में इसकी भागीदारी निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:

आर्थिक निर्णय: भारत को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर वैश्विक वित्तीय नीतियों पर अपनी राय रखने का मंच मिलता है।

निवेश के अवसर: इस समिट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और विदेशी निवेश के नए रास्ते खुलते हैं।

विकासशील देशों की आवाज: भारत यहां ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रतिनिधि के रूप में उभरता है, जिससे विकासशील देशों की समस्याओं को प्राथमिकता मिलती है।

मध्य पूर्व का तनाव और सुरक्षा चिंताएं

बैठक के दौरान मध्य पूर्व (Middle East) की अस्थिर स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि इस क्षेत्र में जारी तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है। सुरक्षा के लिहाज से दोनों नेताओं ने साझा चिंताएं व्यक्त कीं।

Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य पर विशेष ध्यान

भारत और फ्रांस ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को व्यापारिक दृष्टि से “अति-महत्वपूर्ण” करार दिया। ज्ञात हो कि यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और फ्रांस के रणनीतिक हितों के लिए अनिवार्य है।

With AI Inputs

ये भी पढ़ें: Strait of Hormuz पर अब ईरान वसूलेगा टोल टैक्स? किसका है इस पर असली हक, क्या होगा दुनिया की जेब पर असर



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