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भारत में आतंकी घटनाओं में 43% की कमी: पाकिस्तान आतंकवाद से प्रभावित देशों में टॉप पर, अफ्गानिस्तान में सुधार; ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 जारी


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  • Global Terrorism Index 2026: Pakistan Tops List, Afghanistan Improves, India Sees 43% Drop

नई दिल्ली34 मिनट पहले

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भारत में पिछले एक साल में आतंकी घटनाओं में 43% की कमी दर्ज की गई है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 की सूची में भारत 13वें स्थान पर आ गया है। पिछले साल के मुकाबले भारत दो प्वाइंट नीचे आ गया है। इससे पहले भारत 11वें स्थान पर था।

वहीं, सूची के अनुसार दक्षिण एशिया लगातार दसवें वर्ष आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है। पहली बार पाकिस्तान इस लिस्ट में टॉप पर है और आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित देश बन गया है। अफगानिस्तान में हालात में सुधार हुआ है और यह अब शीर्ष दस देशों की सूची से बाहर आ गया है।

दुनियाभर में 2025 में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28% की कमी आई है। आतंकी हमलों की संख्या भी लगभग 22% गिरकर 2,944 हो गई है। कुल मिलाकर इस साल 81 देशों में स्थिति सुधरी है, जबकि 19 देशों में स्थिति खराब हुई।

पश्चिम देशों में मौतें में 280% की बढ़ोतरी

पश्चिमी देशों में आतंकवाद से होने वाली मौतों में लगभग 280% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। साथ ही यूरोपियन यूनियन की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में 14 ईयू देशों में कुल 58 आतंकी हमले दर्ज हुए।

इनमें फ्रांस (14 हमले) और जर्मनी (6 हमले) प्रमुख रहे। इसके अलावा 20 ईयू देशों में आतंकवाद से जुड़े मामलों में 449 लोगों की गिरफ्तारी हुई। ब्रिटेन में 3000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं।

6 फैक्टर प्रोपोगेंडा से युवाओं को एक हफ्ते में बना रहे कट्टरपंथी

  • हिंसा को लेकर डर करते हैं खत्म- चरमपंथी विचारधारा को ‘कूल’ या आधुनिक बनाकर पेश करते हैं। हिंसक घटनाओं को मजाकिया मीम्स में बदल दिया जाता है, जिससे युवाओं के मन में हिंसा का डर खत्म हो जाता है ।
  • गेमिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग- डिस्कॉर्ड, ट्विच, रॉबलॉक्स और फोर्टनाइट जैसे गेमिंग प्लेटफॉर्म पर अलग-थलग महसूस करने वाले किशोरों के साथ दोस्ती करते हैं और दिनों या घंटों के भीतर उनका विश्वास जीत लेते हैं।
  • गेमिफिकेशन- आतंकवाद को एक खेल की तरह पेश किया जा रहा है। ऑनलाइन समूहों में किल काउंट (मौतों की संख्या) के लिए स्कोरबोर्ड बनाए जाते हैं, जो युवाओं को हिंसा के लिए प्रेरित करते हैं।
  • फनल रणनीति- कट्टरपंथी नेटवर्क पहले सोशल मीडिया पर युवाओं को पहचानते हैं और फिर उन्हें टेलीग्राम या सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड चैट रूम में ले जाते हैं। यहां उनका ब्रेनवॉश किया जाता है।
  • किशोरों की संवेदनशीलता- किशोरों के मस्तिष्क का आवेग नियंत्रण के लिए जिम्मेदार हिस्सा विकसित नहीं होता। वे प्रोपेगेंडा से प्रभावित हो बिना सोचे समझे हिंसक कदम उठा लेते हैं।
  • भर्ती का नया तरीका- अब भर्ती के लिए बड़े नेता की जरूरत नहीं पड़ती। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर युवा खुद अपने साथियों को कट्टरपंथी बना रहे हैं।

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