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‘मोटा भाई, जवाब चाहिए’, अमित शाह की ‘चार्जशीट’ के जवाब में TMC ने जारी की ‘काउंटर-चार्जशीट’, BJP पर लगाए आरोप


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oi-Bhavna Pandey

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक बयानबाजी अब ‘चार्जशीट युद्ध’ में बदल गई है। दोनों दलों द्वारा कुछ ही घंटों में एक-दूसरे के खिलाफ आरोप पत्र जारी करने के बाद राज्य का सियासी टकराव आगामी चुनावों से पहले तीव्र हो गया है।

शनिवार को कोलकाता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल सरकार पर भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा, महिलाओं की सुरक्षा में कमी और अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देने सहित कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस शासन के खिलाफ जनता की शिकायतों को आवाज देने का संकल्प लिया है।

West Bengal Election 2026

TMC बोली- मणिपुर पर केंद्र की विफलताओं का जवाब दें

टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं महुआ मोइत्रा, ब्रत्य बसु और कीर्ति आजाद ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने अपनी ‘काउंटर-चार्जशीट’ जारी करते हुए शाह के आरोपों को वोटरों के मन में भ्रम फैलाने वाली राजनीति करार दिया। टीएमसी ने भाजपा से सवाल किया कि बंगाल पर उंगली उठाने से पहले उसे अपने शासित राज्यों, खासकर मणिपुर, और केंद्र की विफलताओं का जवाब देना चाहिए।

ब्रत्य बसु ने कहा कि मणिपुर में हिंसा लगातार तीन साल से जारी है, जिस पर केंद्र अब तक कोई जवाब नहीं दे पाया है। उन्होंने गृह मंत्री की नैतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो तीन वर्षों से जलते राज्य को शांत न कर पाया हो, वह दूसरे राज्यों में सुरक्षा-व्यवस्था के मुद्दे उठाने की नैतिक स्थिति में नहीं है।

TMC बोली- मोटा भाई, जवाब चाहिए

टीएमसी ने शाह के आरोपों पर पलटवार करते हुए अपनी ‘चार्जशीट’ जारी की जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लिया, उनसे राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ में कथित विफलता पर जवाब मांगा। टीएमसी का दावा है कि भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनावों से पहले इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठा रही है। “मोटा भाई, जवाब चाहिए” का नारा तुरंत सुर्खियों में आ गया है।

‘आपने हर बंगाली को अपराधी घोषित कर दिया’

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शाह पर निशाना साधते हुए कहा, “आपने हर बंगाली को अपराधी घोषित कर दिया है। यह चार चरणों में होता है- पहले अपमान, फिर वंचित करना, उसके बाद अपराधी बनाना, और अंततः परेशान करना…।”

‘ED भाजपा के इशारे पर काम करती है’

मोइत्रा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि, “ईडी उन्हीं को रिपोर्ट करता है। इसने लगभग 6,000 मामले दर्ज किए, जिनमें 98% विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं। आपने मात्र 25 लोगों को दोषी ठहराया, जो 0.42% की दर है।”

बंगालियों ने अंग्रेजों से जंग लड़ी, काला पानी में 68% बंगाली थे

टीएमसी सांसद ने बंगालियों के गौरवशाली इतिहास के बारे में बात की। मोइत्रा ने कहा, “बंगाली बहुत स्वाभिमानी होती हैं। हमने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की जंग का नेतृत्व किया। गुजराती कौन थे?” उन्होंने आगे चुनौती दी, “काला पानी में मारे गए और कैद हुए लोगों में से 68% बंगाली थे, जिसके बाद पंजाबी थे। क्या आप एक भी ऐसे गुजराती का नाम बता सकते हैं जो वहां था, आपके ‘बड़े नायक’ वीर सावरकर को छोड़कर, जो सिर्फ माफीनामे लिखते रहते थे? कृपया बताएं।”

अवैध अप्रवासियों को निर्वासित क्‍यों नहीं किया?

टीएमसी ने भाजपा-नियंत्रित चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने आज तक उन विदेशी नागरिकों की सूची जारी नहीं की, जिनके कथित तौर पर मतदाता सूची में होने की बात कही गई थी। टीएमसी ने पूछा भाजपा के केंद्र और अनेक सीमावर्ती राज्यों में सत्ता में होने के बावजूद, केंद्रीय गृह मंत्रालय अवैध अप्रवासियों की पहचान व उन्हें निर्वासित क्यों नहीं कर सका? कथित विदेशी नागरिकों के चुनावी नामावली में नाम सार्वजनिक क्यों नहीं हुए? टीएमसी मानती है कि ये प्रश्न भाजपा की मंशा पर संदेह पैदा करते हैं।

गृह मंत्रालय भाजपा के पास है, तो घुसपैठ रोकेगा कौन?

शाह ने बंगाल को “देश के लिए सबसे बड़ा घुसपैठ कॉरिडोर” बताया था, जिस पर टीएमसी ने सीधे तौर पर पलटवार किया। ब्रत्य बसु ने सवाल किया कि देश की सीमाओं पर नियंत्रण केंद्र सरकार के हाथ में है और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) सीधे गृह मंत्रालय के अधीन आता है। उन्होंने पूछा, “जब केंद्र सरकार, बीएसएफ और गृह मंत्रालय भाजपा के पास है, तो घुसपैठ रोकेगा कौन?”

भाजपा बंगाल की संस्‍कृति के साथ कर रही खिलवाड़

टीएमसी नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह हर चुनाव से पहले बंगाल में ‘बंगाली बनाम बांग्लादेशी’ की बहस छेड़कर समाज को बांटना चाहती है। उन्होंने आशंका जताई कि भाजपा बंगाल की संस्कृति के साथ खिलवाड़ कर रही है और यहां भी असम वाला ‘डिटेंशन कैंप’ मॉडल लागू करना चाहती है। टीएमसी ने इसे भाजपा का ‘राजनीतिक ध्रुवीकरण’ का एजेंडा बताया।



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