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राजस्थान का जवाई क्यों है खास? लेपर्ड, लग्जरी और देसी खाने का अनोखा कॉम्बिनेशन


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Leopard Safari Jawai Pali: राजस्थान का जवाई क्षेत्र इन दिनों विदेशी और देशी पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है. लेपर्ड सफारी के रोमांच के साथ यहां का पारंपरिक राजस्थानी खाना खास आकर्षण बना हुआ है. जंगल के बीच स्थित आरामगाह रिसॉर्ट में मेहमानों को दाल-बाटी, केर-सांगरी और लहसुन की चटनी जैसे व्यंजनों का स्वाद मिलता है. लोक संगीत और लेपर्ड की दहाड़ के बीच भोजन का अनुभव अनोखा बन जाता है. प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव और स्वाद का यह संगम जवाई को तेजी से उभरता पर्यटन हॉटस्पॉट बना रहा है.

राजस्थान का जवाई क्षेत्र इन दिनों पूरी दुनिया के पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है. लेकिन यहां की पहाड़ियों पर लेपर्ड सफारी के रोमांच के साथ-साथ अब एक और चीज पर्यटकों को खींच रही है, वो है यहां का असली राजस्थानी खाना. जवाई के जंगलों के बीच स्थित ‘आरामगाह रिसॉर्ट’ ने अपने खास राजस्थानी कल्चर और फूड के दम पर एक नई पहचान बनाई है. यहां आने वाले मेहमानों को जंगल के सन्नाटे में लेपर्ड की दहाड़ के बीच पारंपरिक दाल-बाटी और केर-सांगरी का लुत्फ उठाने का मौका मिलता है.

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इस रिसॉर्ट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां कई दिग्गज बॉलीवुड एक्टर्स राजस्थानी खाने का स्वाद चख चुके हैं. रिसॉर्ट की खास बात यह है कि यहां विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष रूप से राजस्थानी बुफे का आयोजन किया जाता है. राजस्थानी लोक संगीत की धुनों के बीच जब मेहमान भोजन करते हैं, तो पास के जंगल से आने वाली लेपर्ड की दहाड़ उनके भोजन के अनुभव को यादगार और रोमांचक बना देती है.

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रिसॉर्ट के हेड शेफ बताते हैं कि यहां आने वाले हर गेस्ट को हम राजस्थान की मिट्टी का स्वाद चखाना चाहते हैं. उनके मेन्यू में सेव-टमाटर की सब्जी, राबोड़ी-टमाटर और पंचमेल दाल-बाटी के विशेष काउंटर लगाए जाते हैं. शेफ के मुताबिक, विदेशी पर्यटकों के लिए राजस्थानी कढ़ी एक बड़ा आकर्षण होती है. शेफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे पारंपरिक मसालों के साथ वही ऑथेंटिक स्वाद परोसें, जिसे खाकर पर्यटक अपनी उंगलियां चाटते रह जाएं.

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जैसे ही पर्यटक रिसॉर्ट के रेस्टोरेंट में कदम रखते हैं, उनका स्वागत ‘खम्मागणी’ के मीठे शब्दों के साथ किया जाता है, जो मेहमानों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर देता है. यह रिसॉर्ट पूरी तरह से लेपर्ड एरिया के बीचों-बीच स्थित है. यहां की खासियत यह है कि आप अपने रूम की बालकनी में बैठे हों या डिनर टेबल पर, आपको कभी भी जंगल के राजा (लेपर्ड) की दहाड़ सुनाई दे सकती है, जो इसे राजस्थान के अन्य होटलों से जुदा बनाता है.

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मारवाड़ में दाल-बाटी तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक कि साथ में तीखी लहसुन की चटनी न हो. आरामगाह रिसॉर्ट में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है. दाल-बाटी के काउंटर पर शुद्ध देसी घी की खुशबू के साथ लहसुन की चटनी, मिर्ची का कुटा और मारवाड़ की अन्य चटनी विशेष रूप से परोसी जाती हैं. यह चटपटा कॉम्बिनेशन विदेशी मेहमानों को भी राजस्थानी मसालों का मुरीद बना देता है.

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अगर आप जवाई घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां आपको विदेशी लग्जरी और देसी अंदाज का अनोखा संगम देखने को मिलेगा. अरावली की गोद में बसे जवाई का शांत वातावरण, खूबसूरत नजारे और वन्यजीवों की मौजूदगी इसे खास बनाती है. यहां के रिसॉर्ट्स में आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक राजस्थानी खानपान का स्वाद भी मिलता है. तेंदुओं की सफारी, झीलों की सुंदरता और लोकसंस्कृति का अनुभव पर्यटकों को आकर्षित करता है. प्रकृति, रोमांच और स्वाद का यह अनूठा मेल जवाई को तेजी से लोकप्रिय पर्यटन स्थल बना रहा है



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