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त्रिवेंद्रम2 मिनट पहले
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी केरल के दौरे पर हैं। उन्होंने शनिवार को त्रिवेंद्रम में कहा कि अगर वे पॉलिटिक्स में नहीं होते, तो एयरोस्पेस की दुनिया में एंटरप्रेन्योरशिप करते। राहुल ने कहा कि वे एक पायलट हैं। उनके पिता और चाचा भी पायलट थे। यह परिवार में चलता है।
राहुल गांधी केरल के दो दिन के दौरे पर हैं। वे टेक्नोपार्क में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) फ्रेटरनिटी के साथ बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चाइना के इंडस्ट्रियल सिस्टम की तारीफ की।
राहुल ने कहा- चीन ने एक शानदार इंडस्ट्रियल सिस्टम बनाया है जिसका दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है। लेकिन हमें उनका जबरदस्ती वाला सिस्टम पसंद नहीं। वे डेमोक्रेटिक नहीं हैं।
राहुल गांधी ने केरल के इडुक्की जिले के कुट्टिकनम में चाय बागान के मजदूरों से बातचीत की और वर्कला के शिवगिरी मठ में श्री नारायण गुरु की समाधि पर भी गए।
राहुल ने ये बातें भी कहीं…
- चीन ने इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन सेक्टर पर मजबूत पकड़ बना ली है। वहीं अमेरिका, भारत और दुनिया के ज्यादातर देश सामान बनाने के बजाय उन्हें इस्तेमाल करने या बेचने वाले सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। असल में ज्यादा और स्थायी नौकरियां फैक्ट्रियों में उत्पादन वाले सेक्टर में बनती हैं, जबकि IT जैसे सेक्टर ज्यादातर सेवाएं और खपत से जुड़े होते हैं।
- चीन अभी पूरी आजादी से काम कर रहा है, लेकिन वह चाहते हैं कि वे इस बात को लेकर चिंतित हों कि भारत उस स्पेस में आगे आ रहा है।
- भारत में बहुत कम बिजनेस इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में लगे हुए हैं। अडाणी, अंबानी जैसे बड़े बिजनेसमैन कुछ भी प्रोड्यूस नहीं करते हैं। वे ऐसे प्रोडक्ट बेचते हैं जो हमारे लोकल प्रोडक्शन को नुकसान पहुंचाते हैं।
- इसका एक पॉलिटिकल पहलू भी है। गुड्स एंड सेल्स टैक्स (GST) का मौजूदा फॉर्म इस तरह से डिजाइन किया गया है जो प्रोड्यूसर्स को नुकसान पहुंचाता है।
- यह असल में प्रोड्यूसिंग स्टेट्स को खत्म करता है और कंज्यूमर स्टेट्स की मदद करता है।
- अगर भारत देश की डेमोक्रेटिक वैल्यूज को बनाए रखते हुए एक इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन सिस्टम बना सकता है, तो यह भारत और दुनिया के लोगों की बहुत बड़ी सेवा होगी।
रूस-यूक्रेन और इजराइल-ईरान जंग का उदाहरण दिया
राहुल ने जियोपॉलिटिकल कंडीशन का उदाहरण देते हुए कहा- अगर आप यूक्रेन जाकर देखें कि युद्ध के मैदान में क्या हो रहा है, तो आप पाएंगे कि सर्कुलर मोशन, ड्रोन इंटरनल कम्बशन इंजन को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। ईरान में, आप देखेंगे कि मिलिट्री हिस्सा बैटरी ऑप्टिक्स और इलेक्ट्रिक मोटर की तरफ जा रहा है। इन टेक्नोलॉजी पर किसका दबदबा है? चीन का। यह, हमारे लिए, एक बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि हम ही ऐसे लोग हैं जो यह बदलाव ला सकते हैं। सही पॉलिसी और विजन होने पर, भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सर्कुलर मोशन पर चीन से मुकाबला कर सकता है।
शिवगिरी मठ भी गए राहुल, देखें तस्वीरें…








