Cricket
oi-Naveen Sharma
Ishan Kishan: रविवार की शाम जब पूरा देश टी20 वर्ल्ड कप फाइनल के जश्न में डूबा था और इशान किशन मैदान पर चौके-छक्के बरसा रहे थे, तब उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा हुआ था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इशान किशन ने जिस साहस का परिचय दिया, वह किसी मिसाल से कम नहीं है।
इशान फाइनल खेल रहे थे, जबकि उनके पिता सैकड़ों किलोमीटर दूर सिलीगुड़ी के एक मुर्दाघर में अपनों के शवों के पास खड़े थे। घटना शुक्रवार को हुई, जब इशान किशन की चचेरी बहन और उनके पति की भीषण कार दुर्घटना में जान चली गई।

इशान किशन के पिता प्रणव पांडे उस समयपटना एयरपोर्ट जा रहे थे ताकि वहां से अहमदाबाद जाकर अपने बेटे को वर्ल्ड कप फाइनल खेलते देख सकें। उसके बाद पिता का जाना कैंसल हो गया। दर्द भरे माहौल में इशान किशन ने खेलते हुए फाइनल में फिफ्टी जमाई।
इस भयावह एक्सीडेंट में जहां इशान के बहन और जीजा नहीं रहे, वहीं एक चमत्कार भी हुआ। उनके दो मासूम बच्चे इस हादसे में सुरक्षित बच गए, उनमें एक की उम्र 6 साल और दूसरे की 3 महीने है। किशन के पिता प्रणव पांडे ने अत्यंत दुख के साथ बताया कि अनर्थ हो गया, हम लोग बहुत बड़ी मुसीबत में हैं।
फाइनल की पूर्व संध्या पर इशान के पिता सिलीगुड़ी के मुर्दाघर में कानूनी औपचारिकताओं और शोक में डूबे थे, लेकिन उन्होंने इशान को विचलित नहीं होने दिया। इशान किशन ने अपनी इस निजी त्रासदी और मानसिक पीड़ा को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने न केवल फाइनल खेला, बल्कि 25 गेंदों में 54 रनों की आक्रामक पारी खेलकर टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एक तरह से फाइनल जीतकर अपनी बहन को ट्रिब्यूट दिया है।



