सुपरटेक मामले में एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, सुपरटेक लिमिटेड और नोबिलिटी एस्टेट्स के दिवाला समाधान प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर रेगुलेटर भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने दिवालियापन विशेषज्ञ हितेश गोयल का रजिस्ट्रेशन दो साल के लिए निलंबित कर दिया है। गोयल पर समय पर मीटिंग न करने और अहम जानकारियां छिपाने का आरोप है। वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कंपनी एनबीसीसी को सुपरटेक के 16 प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा करने का आदेश देकर हजारों घर खरीदारों को बड़ी राहत दी है।
क्या है पूरा मामला?
आईबीबीआई की अनुशासन समिति की ओर से 30 मार्च को जारी किए गए एक आदेश में कहा गया कि हितेश गोयल ‘दिवाला और दिवालियापन संहिता’ (आईबीसी) और उससे जुड़े नियमों के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल रहे।
गौरतलब है कि सुपरटेक लिमिटेड को मार्च 2022 में दिवाला प्रक्रिया के दायरे में लाया गया था। शुरुआत में गोयल को अंतरिम समाधान पेशेवर बनाया गया। हालांकि, बाद में उन्हें मुख्य समाधान पेशेवर के तौर पर कन्फर्म कर दिया गया था। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया था कि दिवाला प्रक्रिया सिर्फ ‘इको विलेज 2’ प्रोजेक्ट तक ही सीमित रखी जाए, जबकि बाकी चल रहे प्रोजेक्ट्स अंतरिम समाधान पेशेवर आईआरपी की देखरेख में ही चलते रहेंगे।
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इन गंभीर चूकों के चलते गिरी गाज
जांच में यह पाया गया कि हितेश गोयल ने ‘इको विलेज 2’ प्रोजेक्ट से जुड़े ‘इन्फॉर्मेशन मेमोरेंडम’ में बुनियादी जानकारियां छिपाईं। पेंडिंग और पूरे हो चुके टावरों या फ्लैटों की सही स्थिति, जो फ्लैट बिके नहीं हैं, उनका ब्योरा, फ्लैटों पर लोगों के रहने से जुड़ी जानकारियां और जरूरी सर्टिफिकेट्स जैसे जानकारी छिपाई गई। इसके अलावा गोयल ने निर्धारित समय सीमा के भीतर ‘क्रेडिटर्स की समिति’ (सीओसी) की पहली बैठक तक नहीं बुलाई। साथ ही, मेमोरेंडम और सीआईआरपी फॉर्म-3 दाखिल करने में भी देरी की। कुछ ऐसे ही गंभीर नियमों के उल्लंघन ‘नोबिलिटी एस्टेट्स’ के मामले में भी पाए गए। इसी के चलते आईबीबीआई के अधिकारी भूषण कुमार सिन्हा और जयंती प्रसाद ने गोयल के रजिस्ट्रेशन को तत्काल प्रभाव से 2 साल के लिए सस्पेंड करने का आदेश सुना दिया।
सुप्रीम कोर्ट से घर खरीदारों को मिली बड़ी उम्मीद
एक तरफ जहां कागजी प्रक्रियाओं में इतनी बड़ी लापरवाही चल रही थी, वहीं दूसरी तरफ अपने सपनों के घर के लिए करीब दो दशकों से इंतजार कर रहे हजारों बेबस घर खरीदारों के लिए राहत की खबर भी आई। इसी साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश को बरकरार रखा था। इस आदेश में सरकारी कंपनी एनबीसीसी (एनबीसीसी) को कर्ज में डूबी सुपरटेक लिमिटेड के 16 अटके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सबसे बड़ी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी अदालतों और ट्रिब्यूनलों पर इस बात की पाबंदी लगा दी है कि वे ऐसा कोई भी आदेश पारित न करें जिससे एनबीसीसी के निर्माण कार्य में किसी भी तरह की रुकावट आए।



