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सोने-चांदी में 40 साल की सबसे बड़ी गिरावट: क्या यह निवेशकों के लिए खरीदारी का सही मौका है? जानकार क्या कह रहे


वैश्विक कमोडिटी बाजार इस समय भारी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, मजबूत अमेरिकी डॉलर और महंगाई की चिंताओं के कारण सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 40 वर्षों में सोने की इस सबसे बड़ी साप्ताहिक मंदी ने वैश्विक और घरेलू निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। आइए इस विस्तृत प्रश्नोत्तर रिपोर्ट के जरिए समझते हैं कि इस गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण क्या हैं और अर्थव्यवस्था व निवेशकों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

सवाल: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में कितनी गिरावट आई है?

जवाब: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में भारी सुधार देखा गया है। 13 मार्च को 5,200 डॉलर प्रति औंस पर रहने वाला सोना 23 मार्च तक तेजी से गिरकर 4,354 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। इससे पहले यह धातु 5,595.51 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू चुकी थी। भारतीय घरेलू बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में 7 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। शुरुआत में 1,40,158 रुपये पर खुला सोना 1,29,595 रुपये तक लुढ़क गया, जबकि चांदी 1,99,643 रुपये के निचले स्तर को छूने के बाद 2,09,797 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है।

सवाल: सोने की इस ऐतिहासिक मंदी के मुख्य कारण क्या हैं?

जवाब: इस तेज गिरावट के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच का संघर्ष, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हो गई है। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड ऑयल पिछले 30 दिनों में 56 प्रतिशत उछलकर 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। दूसरा, ऊर्जा महंगी होने से मुद्रास्फीति बढ़ने की चिंताएं गहरी हो गई हैं। तीसरा, अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं से हट रहा है। इसके अलावा, सैक्सो बैंक के कमोडिटी रणनीति प्रमुख ओले हैनसेन के अनुसार, मध्य पूर्व संघर्ष के बीच कुछ अर्थव्यवस्थाओं द्वारा नकदी  जुटाने के लिए सोने की बिक्री की अटकलें भी बाजार पर दबाव बना रही हैं।

सवाल: ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों का बाजार पर क्या असर पड़ रहा है?

जवाब: महंगाई की चिंताओं ने ब्याज दरों से जुड़ी बाजार की उम्मीदों को पूरी तरह बदल दिया है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी के अनुसार, बाजार जो पहले ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहा था, अब दरों के स्थिर रहने या उनमें बढ़ोतरी होने की संभावना जता रहा है। जब ब्याज दरें और वास्तविक प्रतिफल ऊंचे होते हैं, तो सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश साधनों का आकर्षण कम हो जाता है। 

सवाल: क्या मौजूदा स्थिति लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का सही अवसर है?

जवाब: वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर हो सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, फिलिप नोवा की वरिष्ठ बाजार विश्लेषक प्रियंका सचदेवा ने इस गिरावट को लंबी अवधि के खरीदारों के लिए ‘चरणबद्ध’ तरीके से बाजार में प्रवेश करने का ‘सुनहरा मौका’ बताया है। हालांकि, तकनीकी रूप से कीमतें 4,154 डॉलर प्रति औंस (200-दिवसीय मूविंग एवरेज) के निचले स्तर तक भी जा सकती हैं, जहां बाजार के स्थिर होने की उम्मीद है।

सवाल: भारतीय आभूषण उद्योग और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

जवाब: इस अस्थिरता का सीधा असर भारतीय व्यापार पर दिखने की आशंका है। कामा ज्वेलरी के प्रबंध निदेशक कॉलिन शाह के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू खपत पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू अर्थव्यवस्थाओं में इस उठापटक के कारण भारत के रत्न और आभूषण निर्यात को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है। सोने और चांदी की कीमतों में आई यह भारी गिरावट वैश्विक अनिश्चितताओं, उच्च मुद्रास्फीति और मजबूत डॉलर का सीधा परिणाम है। अल्पकालिक अस्थिरता के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि सोने का दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। निवेशकों को बाजार के स्थिर होने का इंतजार करते हुए सतर्कता के साथ निवेश के अवसरों का आकलन करना चाहिए।





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