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दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो मुन्नाभाई स्टाइल में ऑनलाइन एग्जाम दिलाता था. पुलिस ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड को अरेस्ट किया है. साथ ही, इस गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.
दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन परीक्षा दिलाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को अरेस्ट किया है.
Delhi News: द्वारका के सेक्टर-23 इलाके में स्थित ‘हैप्पी होम’ नाम की बिल्डिंग में चल रहे ऑनलाइन परीक्षा में नकल के बड़े रैकेट का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड हर्षवर्धन (28) को अरेस्ट किया है. यह रैकेट परीक्षाओं में असली कैंडिडेट की जगह पेपर सॉल्वर बैठाकर एग्जाम दिलाने का हाईटेक धंधा चला रहा था.
दिल्ली पुलिस के अनुसार, उन्हें इंटेल मिली थी कि द्वारका के इस मकान में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं. सूचना के आधार पर जब पुलिस टीम ने छापा मारा तो अंदर का नजारा देखकर हैरान रह गई. मौके पर देश के अलग-अलग कॉलेजों के 32 मेधावी छात्र मौजूद मिले. जांच में पता चला कि हैप्पी होम फ्लैट को करीब 5 दिनों के लिए किराये पर लिया गया था.
- इस फ्लैट में ऑनलाइन परीक्षा में नकल कराने का पूरा सेट-अप बनाया गया था. पूछताछ में इन छात्रों ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन सवाल हल करने के लिए बुलाया गया था.
- लेकिन जब पुलिस ने एडमिट कार्ड की जांच की तो खुलासा हुआ कि ये छात्र खुद परीक्षा देने नहीं आए थे, बल्कि किसी दूसरे कैंडिडेट की जगह परीक्षा देने वाले थे.
- पूछताछ में मुख्य आरोपी हर्षवर्धन ने खुलासा किया कि वह मुंबई के एक प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान की प्रवेश परीक्षा में उम्मीदवारों को पास कराने के लिए पूरा नेटवर्क चलाता था.
- उसके मुताबिक परीक्षा जयपुर के एक आईटी लैब में आयोजित होनी थी. वह एनी डेस्क और एमी एडमिन जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए वहां के कंप्यूटर सिस्टम को एक्सेस करता था.
- इसके बाद, इस रैकेट के इशारे पर मेधावी बच्चों को द्वारका बुलाया जाता और उनसे मैनेजमेंट संस्थान की प्रवेश परीक्षा के पेपर सॉल्व कराए जाते थे.
- छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से लैपटॉप, मोबाइल फोन और कंप्यूटर सिस्टम भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन परीक्षा में चीटिंग कराने के लिए किया जा रहा था.
कहां से अरेंज किए जाते थे असली कैंडिडेट की जगह पेपर देने वाले मेथावी छात्र?
जांच में सामने आया कि इस पूरे रैकेट में प्रांजल नाम का युवक भी शामिल था, जिसका काम अलग-अलग कॉलेजों से पेपर सॉल्वर यानी सवाल हल करने वाले छात्रों को अरेंज करना था. वहीं हर्षवर्धन उम्मीदवारों को पकड़कर परीक्षा दिलाने का काम करता था.
पेपर सॉल्व करने के एवज में इन छात्रों को कितने रुपए दिए जाते थे?
पूछताछ के दौरान, आरोपी ने पुलिस को बताया कि इन छात्रों को एक सवाल हल करने के बदले 500 से 1000 रुपये तक दिए जाते थे. जबकि किसी कैंडिडेट की पूरी परीक्षा पास कराने के एवज में लाखों रुपये वसूले जाते थे.
क्या पेपर देने वाले बच्चों को पता था कि वह किसी दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे हैं?
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि 32 में से कुछ छात्र ऐसे थे जिन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि वे किसी और की जगह परीक्षा दे रहे हैं, जबकि कुछ छात्र पहले भी इस तरह की परीक्षा में शामिल हो चुके थे और उन्हें पूरी जानकारी थी.
दिल्ली पुलिस ने पकड़े गए छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है. वहीं मौके पर मिले छात्रों को फिलहाल बाउंड डाउन किया गया है. पुलिस के मुताबिक यह ऑनलाइन परीक्षा में रिमोट एक्सेस के जरिए चीटिंग कराने वाला एक संगठित गिरोह है.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें



