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’16 की उम्र में क्लब के बाहर 20 रु. में खुद की CD बेची’, Dhurandhar के इस बड़े स्टार का सच, यूं बदली किस्मत


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oi-Purnima Acharya

Jasmine Sandlas: जैस्मिन सैंडलस जिनकी आवाज अब स्ट्रीमिंग प्लेलिस्ट में गूंज रही है, कभी सिर्फ एक टीनएजर थीं जो अपनी आवाज सुनाने की कोशिश कर रही थीं। इंडस्ट्री में किसी सपोर्ट के बिना, उन्होंने म्यूजिक में अपना करियर, खुद बनाई CDs से शुरू किया। वहीं आज ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल ‘धुरंधर 2’ के उनके गाने हर प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रहे हैं।

ग्लोबल साउंड के लिए फेमस हैं जैस्मिन सैंडलस
जैस्मिन सैंडलस पंजाबी जड़ों और ग्लोबल साउंड के अपने खास मेल के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में वह फिल्म ‘धुरंधर’ के टाइटल सॉन्ग, ‘शरारत’ और ‘धुरंधर 2’ के ‘मैं और तू’ और ‘जाइए सजना’ जैसे ट्रैक्स के लिए चर्चा में रही हैं।

Jasmine Sandlas

जैस्मिन को ऐसे मिला ‘धुरंधर’ का ऑफर

-सिंगर जैस्मिन सैंडलस ने हाल ही में ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे के साथ बातचीत में अपने नए काम से जुड़े एक खास पल के बारे में बताया। जैस्मिन ने कहा- फिल्म ‘धुरंधर 2’ का एक गाना रिलीज से कुछ घंटे पहले, सुबह-सुबह रिकॉर्ड किया गया था। मैं थकी हुई थी लेकिन इमोशनली स्ट्रॉन्ग थी।

-जैस्मिन सैंडलस ने कहा- मैं सुबह 4 बजे स्टूडियो में गई और जाइये सजना को बिना किसी झिझक के गाया। मेरे लिए ये एक याद दिलाने वाला गाना था जो कि कभी-कभी सबसे ईमानदार परफॉर्मेंस परफेक्शन से नहीं बल्कि कमजोरी से निकलती हैं।

पंजाब के जालंधर से कैलिफोर्निया तक का सफर

-आपको बता दें कि जैस्मिन सैंडलस पंजाब के जालंधर में पली-बढ़ी। वह एक छोटी लड़की थी जिसके पास एक नोटबुक थी जिसमें वह कविताएं लिखती थी और विचारों को धुनों में ढालती थी। शोहरत कभी उसका लक्ष्य नहीं था।

-जैस्मिन सैंडलस ने बताया- मुझे मेरी मां से हिम्मत मिली कि मैं अपनी आवाज को कभी न दबाऊं। मैं अपनी आवाज को बुलंद बनाती गई और चुपचाप मेरा कॉन्फिडेंस भी बढ़ता रहा। मुझे इसका असर समझ में आने लगा था।

-13 साल की उम्र में मैं कैलिफोर्निया शिफ्ट हो गई थी। मेरे लिए वो एक ऐसी दुनिया थी, जहां मैं सब कुछ नहीं जानती थी। इस बदलाव ने मुझे अकेला महसूस कराया, संस्कृतियों के बीच फंसी हुई और ये खोजती हुई कि मैं कहां हूं लेकिन म्यूजिक मेरा सहारा बन गया। पंजाबी जड़ों को वेस्ट कोस्ट हिप-हॉप के साथ मिलाकर, मैंने एक अनोखा अपना साउंड बनाना शुरू किया।

16 साल की उम्र से बेच रही हैं खुद की CD

-जैस्मिनने कहा- 16 साल की उम्र तक मैं अपना रास्ता खुद बना रही थी। मंजूरी का इंतजार किए बिना, मैं क्लबों के बाहर खड़ी होकर खुद बनाई CD बेचती थी, वो भी सिर्फ 20 रुपए में। कोई शॉर्टकट नहीं, कोई कनेक्शन नहीं, कोई वादा नहीं, बस ये विश्वास कि कोई न कोई, कहीं न कहीं, मेरी बात जरूर सुनेगा।

-जैस्मिन सैंडलस का रिलीज हुआ पहला गाना ‘मुस्कान’ उनके लिए एक टर्निंग प्वाइंट बन गया था, भले ही इससे उन्हें लगा कि वह बेबस हैं। यही कमजोरी उनकी ताकत बन गई। ‘गुलाबी’, ‘यार ना मिले’ और ‘इल्लीगल वेपन’ जैसे गानों से, वह ज्यादा लोगों तक पहुंचीं और एक जानी-मानी आवाज बन गईं, फिर भी जैसे-जैसे शोहरत बढ़ी, उन्होंने किसी एक तय ढांचे में फिट होने से खुद को रोका।

‘परफेक्शन से ज्यादा एक्सप्रेशन है जरूरी’

-‘धुरंधर’ ने जैस्मिन सैंडलस के सफर को एक अहम मोड़ दिया, जिसने उन्हें क्रिएटिव और इमोशनल, दोनों तरह से आगे बढ़ाया। इसके लिए सिर्फ एक्यूरेसी से ज्यादा की जरूरत थी और इसमें गहराई की भी जरूरत थी।

-जैस्मिन सैंडलस ने बताया- आज भी अपनी शोहरत के बावजूद मैं अपनी शुरुआत से जुड़ी हुई हूं। वह लड़की जो कभी क्लब के बाहर CD बेचती थी, आज भी उस आर्टिस्ट में जिंदा है जो परफेक्शन से ज्यादा एक्सप्रेशन को प्राथमिकता देती है।

-सिंगर ने बताया- मेरा सफर 20 रुपये में म्यूजिक बेचने से लेकर बड़ी फिल्मों के लिए लास्ट-मिनट ट्रैक रिकॉर्ड करने तक, न सिर्फ ग्रोथ दिखाता है बल्कि खुद के प्रति सच्चे रहने का पक्का कमिटमेंट भी शो करता है।



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