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Gujarat By-Election 2026: उमरेठ सीट से हर्षदभाई गोविंदभाई परमार मैदान में, क्या है BJP का दांव?


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Gujarat By-Election 2026: गुजरात की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उमरेठ विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है।

भाजपा ने इस सीट से हर्षदभाई गोविंदभाई परमार (Harshadbhai Govindbhai Parmar) को चुनावी मैदान में उतारा है। यह उपचुनाव भाजपा के सीनियर नेता और पूर्व विधायक गोविंदभाई परमार के निधन के कारण खाली हुई सीट को भरने के लिए कराया जा रहा है।

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हर्षदभाई परमार दिवंगत विधायक गोविंदभाई के पुत्र हैं। पार्टी ने ‘सहानुभूति लहर’ और परिवार की मजबूत स्थानीय पकड़ को देखते हुए हर्षदभाई पर भरोसा जताया है।

उमरेठ सीट पर क्यों अहम है उपचुनाव?

उमरेठ विधानसभा सीट पर होने वाला यह उपचुनाव गुजरात की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है। आणंद जिले की उमरेठ (111) विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती रही है। यहां से विधायक रहे गोविंदभाई रायजीभाई परमार का लंबी बीमारी के बाद 6 मार्च, 2026 को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद चुनाव आयोग ने इस रिक्त सीट पर उपचुनाव की घोषणा की है।

मतदान 23 अप्रैल, 2026 होगा जिसका परिणाम की तारीख 4 मई, 2026 को आएगा। उमरेठ विधानसभा सीट राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस सीट पर उपचुनाव होने के पीछे स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां और सीट के खाली होने की वजह रही है। ऐसे में सभी प्रमुख दल इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।

क्या है भाजपा की रणनीति, विरासत और विकास का मेल

BJP ने हर्षदभाई गोविंदभाई परमार पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा है। हर्षदभाई परमार को टिकट देना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है। परमार को स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है, जो पार्टी संगठन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। माना जा रहा है कि उनकी छवि और जमीनी पकड़ पार्टी को फायदा पहुंचा सकती है। गोविंदभाई परमार ने 2017 और 2022 के चुनावों में लगातार जीत दर्ज की थी। क्षेत्र में उनकी छवि एक जमीन से जुड़े नेता की थी।

BJP द्वारा हर्षदभाई परमार को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी इस सीट को अपने कब्जे में बरकरार रख पाती है या विपक्ष कोई बड़ा उलटफेर करता है। हर्षदभाई अपने पिता के कार्यकाल के दौरान भी क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पैठ है।

जातीय समीकरण पर ध्यान दें तो उमरेठ सीट पर क्षत्रिय और ओबीसी मतदाताओं का अच्छा प्रभाव है, जहां परमार परिवार की स्वीकार्यता काफी अधिक है। हालांकि BJP ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, लेकिन अब नजर कांग्रेस और अन्य दलों की रणनीति पर टिकी है। विपक्ष इस सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारकर BJP को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। ऐसे में उमरेठ सीट पर सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

विपक्ष की घेराबंदी शुरू

उमरेठ सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है। जहां भाजपा ने अपना पत्ता खोल दिया है, वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) भी जल्द ही अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर सकते हैं। 2022 के चुनाव में गोविंदभाई परमार ने एनसीपी (NCP) के उम्मीदवार जयंत पटेल ‘बोस्की’ को करीब 26,000 वोटों से हराया था। इस बार विपक्ष एकजुट होकर भाजपा को इस गढ़ में चुनौती देने की तैयारी में है।

उमरेठ विधानसभा सीट पर होने वाला यह उपचुनाव गुजरात की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है। BJP द्वारा हर्षदभाई परमार को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी इस सीट को अपने कब्जे में बरकरार रख पाती है या विपक्ष कोई बड़ा लटफेर करता है।



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