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oi-Bhavna Pandey
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के ईरान युद्ध को लेकर किए गए एक दावे ने 1 अप्रैल को नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के नए शासक ने अमेरिका से युद्धविराम की बात की है, लेकिन ईरान ने इन दावों को सीरे से खारिज कर दिया है।
ईरान ने इसे सीधा-सीधा “अप्रैल फूल का मजाक” और “झूठा व निराधार” बताते हुए तत्काल कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अब दोनों तरफ से बयानबाज़ी तेज हो गई है।

ट्रंप का दावा क्या था?
दरअसल, बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ईरान के नए शासक ने अमेरिका से युद्धविराम के लिए संपर्क साधा है। ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान के “नए शासक” अपने पूर्व के शासकों से “कम कट्टरपंथी” हैं। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने को किसी भी समझौते की शर्त बताया था।
ईरान ने दिया करारा जवाब
ईरान ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उसने इसे “झूठा”, “निराधार” और “अप्रैल फूल का मजाक” बताते हुए कहा कि ऐसा कोई संपर्क या प्रस्ताव हुआ ही नहीं है। ईरान के मुताबिक, यह बयान सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश है।
मुंबई में ईरानी दूतावास ने ट्रंप की उड़ाई खिल्ली
मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने भी बुधवार को एक तीखे सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस विवाद पर पलटवार किया।दूतावास ने ट्रंप द्वारा “नए” ईरानी राष्ट्रपति के जिक्र का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, Masoud Pezeshkian पहले से ही राष्ट्रपति हैं, कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। दूतावास ने तंज कसते हुए लिखा कि “राष्ट्रपति ट्वीट से नहीं बदलते, उसके लिए चुनाव होते हैं।”
On April Fools’ Day, it’s almost poetic that Donald #Trump still manages to outdo the jokes; talking about a “new” #Iran #president when Dr. #Pezeshkian has been in office all along.
Reality check: presidents aren’t replaced by tweets… that’s what elections are for. pic.twitter.com/157dOWtOVL
— Consulate General of the I.R. Iran in Mumbai (@IRANinMumbai) April 1, 2026 “>
ईरान ने ट्रंप पर कसा तंज
दूतावास ने चुटकी लेते हुए कहा, “अप्रैल फूल के दिन, डोनाल्ड ट्रंप अभी भी चुटकुलों को मात देने का प्रबंधन करते हैं।” यह टिप्पणी ट्रंप के उस बयान पर सीधा व्यंग्य थी जिसमें ईरान के नेतृत्व में बदलाव के संकेत दिए गए थे।
बयानबाज़ी के पीछे की क्या है वजह?
यह पूरा मामला सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे चल रहे “सूचना युद्ध” का हिस्सा माना जा रहा है। एक तरफ अमेरिका समुद्री रास्तों और ऊर्जा सप्लाई को लेकर दबाव बना रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ ईरान इन दावों को खारिज कर अपनी स्थिति मजबूत करने में लगा है।
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