भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कॉपीराइट नियमों के भविष्य को तय करने वाले पहले सबसे बड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। समाचार एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनेशनल यानी एएनआई और चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के बीच चल रहे इस विवाद पर कोर्ट का अंतरिम आदेश जल्द ही आने की उम्मीद है। यह आदेश एआई मॉडल ट्रेनिंग और कंटेंट के उपयोग से जुड़े मामलों के लिए मार्गदर्शक सबित होगा। इस मामले में डीएनपीए समेत कई अन्य संगठनों ने भी एएनआई के समर्थन में अदालत के सामने अपना पक्ष रखा है।
डीएनपीए ने किया एएनआई का समर्थन
इस मुकदमें में एएनआई और ओपनएआई के अलावे छह अन्य पक्षों ने भी हिस्सा लिया। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए), इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री और फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स ने इस मामले में एएनआई का समर्थन किया। उनका तर्क है कि आउटपुट मूल रचनाओं की जगह ले सकते हैं, जिससे मीडिया और रचनाकारों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। वहीं, ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम, फ्लक्स लैब्स एआई और आईजीएपी प्रोजेक्ट एलएलपी ने ओपनएआई का समर्थन करते हुए कहा कि बड़े लैंग्वेज मॉडल कॉपीराइट कार्यों की नकल नहीं करते और सार्वजनिक जानकारी का सारांश बनाना कोई अपराध नहीं है।
विवाद का मूल कारण और एनआई के आरोप
यह कानूनी लड़ाई 19 नवंबर 2024 को शुरू हुई थी और 27 मार्च 2026 तक इसमें कुल 32 बार लंबी सुनवाई हुई। जस्टिस अमित बंसल की अदालत में एएनआई ने मुख्य रूप से आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने बिना अनुमति या लाइसेंस फीस दिए उसके कॉपीराइट वाले समाचारों का उपयोग चैटजीपीटी को प्रशिक्षित करने के लिए किया है।



