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Customs Duty: वित्त मंत्रालय ने 30 जून तक प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी में दी छूट, जानिए मायने


पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों और आम जनता को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में छूट देने का एलान किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह रियायत 30 जून तक लागू रहेगी। इस कदम का मकसद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष प्रभावित होने वाली आपूर्ति शृंखला को दुरुस्त करने के लिए प्रमुख सेक्टर्स को कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल में उबाल

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इस युद्ध के कारण महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग बाधित हुए हैं, जिससे भारत में उर्वरक (फर्टिलाइजर), कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि भारत उर्वरक और पेट्रोलियम का एक प्रमुख आयातक देश है। इस युद्ध के शुरू होने के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत का भारी उछाल आ चुका है। 

उद्योगों के लिए रणनीतिक राहत

वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, कस्टम ड्यूटी में छूट का मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल इनपुट की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और डाउनस्ट्रीम (आश्रित) क्षेत्रों पर लागत का दबाव कम करना है। 

सरकार ने जिन प्रमुख उत्पादों को कस्टम ड्यूटी से मुक्त किया है, उनमें मेथेनॉल, निर्जल अमोनिया, टोल्यूनि , स्टाइरीन, डाइक्लोरोमेथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इस फैसले से निम्नलिखित सेक्टर्स को सीधा फायदा होगा:


  • प्लास्टिक्स और पैकेजिंग: कच्चे माल की लागत घटने से इस सेक्टर में उत्पादन सस्ता होगा।

  • टेक्सटाइल्स: कपड़ा उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने में मदद मिलेगी।

  • फार्मा और केमिकल्स: दवा उद्योग और रसायन क्षेत्र को सप्लाई में स्थिरता मिलेगी।

  • ऑटो कंपोनेंट्स: ऑटोमोबाइल कलपुर्जे बनाने वाले उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन लागत घटने का फायदा अंतिम उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर से आम जनता को बचाने के लिए सरकार ने पिछले सप्ताह ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती की थी। इस कटौती के बाद वर्तमान में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क मात्र 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर उत्पाद शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगा दिया है।


 



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