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Oi Explained: Suez Canal पर टोल जायज तो होर्मुज पर नाजायज कैसे? क्या कहता है अंतर्राष्ट्रीय कानून?


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oi-Siddharth Purohit

Oi Explained: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब Strait of Hormuz को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। ईरान इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों पर “टोल” लगाने की बात कर रहा है। कुछ लोग इसकी तुलना Suez Canal से कर रहे हैं, जहां पहले से ही जहाजों से शुल्क लिया जाता है। लेकिन क्या ये तुलना सही है? इसी सवाल ने ये पूरी बहस खड़ी कर दी है।

स्वेज कनाल कैसे जायज?

Suez Canal एक पूरी तरह मानव निर्मित नहर है, जिसे 1869 में फ्रांसीसी इंजीनियरों की मदद से बनाया गया था। यह भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) को लाल सागर (Red Sea) से जोड़ती है और यूरोप से एशिया के बीच समुद्री दूरी को हजारों किलोमीटर कम कर देती है।

Oi Explained Hormuz Vs Suez Canal

• इस नहर को बनाने में करीब 10 साल लगे
• यह पूरी तरह मिस्र (Egypt) के कंट्रोल में है
• यहां से गुजरने वाले हर जहाज को टोल देना पड़ता है
• यह टोल एक तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर यूज़ फीस है

Oi Explained Hormuz Vs Suez Canal

2021: जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंस गया था जहाज

यानी सरल शब्दों में, जो रास्ता इंसान ने बनाया, उसका इस्तेमाल करने के लिए शुल्क लेना जायज माना जाता है।

किसने बनाया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

दूसरी तरफ Strait of Hormuz एक प्राकृतिक जलडमरुमध्य (Natural Strait) है, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर से जोड़ता है।

• दुनिया के लगभग 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है
• इसकी चौड़ाई कुछ जगहों पर सिर्फ 33 किलोमीटर है
• यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग (International Waters) के तहत आता है

यहां सबसे अहम बात है कि यह किसी एक देश की बनाई हुई संपत्ति नहीं है, बल्कि प्राकृतिक रूप से बना समुद्री मार्ग है।

क्या कहता है अंतर्राष्ट्रीय कानून?

अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS), साफ कहता है कि:

• अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से सभी देशों के जहाजों को फ्री ट्रांजिट (Transit Passage) का अधिकार है।
• कोई भी देश वहां मनमाने तरीके से टोल नहीं लगा सकता।
• केवल सुरक्षा या पर्यावरण कारणों से सीमित नियम लागू हो सकते हैं।
इसका मतलब, होर्मुज पर स्वेज जैसा टोल लागू करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना जा सकता है।

अगर ईरान टोल लगाता है तो क्या होगा?

अगर ईरान वास्तव में टोल लगाने की कोशिश करता है, तो इसके बड़े असर हो सकते हैं। जैसे-पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में अचनाक से तेज उछाल आ जाएगा, जो लगभग हर उस देश में। महंगाई ला सकता है जहां ईरानी तेल का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, समुद्री व्यापार की लागत बढ़ेगी जिससे अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ तनाव बढ़ेगा। टोल लगने की वजह से सैन्य टकराव का खतरा भी बार-बार बनता रहेगा।

दुनिया में कितने समुद्री रास्ते प्रमुख हैं?

अगर होर्मुज पर टोल लागू होता है, तो दुनिया के अन्य अहम स्ट्रेट्स पर भी इसका असर पड़ सकता है:

1. Strait of Malacca- एशिया का सबसे व्यस्त मार्ग
2. Bab el-Mandeb- यूरोप-एशिया कनेक्शन
3. Bosporus Strait- यूरोप और एशिया के बीच
4. Strait of Gibraltar
5. Panama Canal (यह भी स्वेज की तरह मानव निर्मित है)

6. Bering Strait (रूस-अमेरिका के बीच सबसे विवादित स्ट्रेट)

इनमें से ज्यादातर प्राकृतिक स्ट्रेट्स हैं, जहां टोल लगाना अंतरराष्ट्रीय विवाद को जन्म दे सकता है।

तो फिर ईरान की तुलना क्यों गलत है?

सीधी भाषा में कहें तो, स्वेज नहर इंसानों द्वारा बनाई गई। इसको बनाने में उस जमाने में भी खर्च अच्छा खासा हुआ था। इसे बनाने के दो मकसद थे, पहला- समुद्री रास्ता छोटा हो और माल ढुलाई आसाना। दूसरा- इसको बनाकर टोल लिया जा सके जो देश के राजस्व में बढ़ोतरी करे। इसके अलावा इसको मेनटेन करने में काफी खर्च होता है। इसमें हाल के सालों में जहाज भी फंस गया था। जो बताता है कि ऐसी घटनाओं के लिए मिस्र को काफी खर्चा करना पड़ता है। इसके एक साल के मेनटेनेंस में 20 से 40 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं। जबकि 2023 में इजिप्ट ने इससे करीब 95 हजार करोड़ रुपए कमाए थे। इसलिए टोल को जायज कहा जा सकता है।

वहीं दूसरी तरफ, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, प्रकृति द्वारा बना बना है। न इसमें किसी इंजीनियर का योगदान है और न ही इसे मेनटेन करने का कोई सालाना खर्च है। भले ही यह ईरान के करीब हो लेकिन यह अंतर्राष्ट्रीय सीमा में माना गया है। न ईरान इसे मेनटेन करता है, न इसकी सुरक्षा में कुछ खर्च करता है और न ही यहां से गुजरने वाले जहाजों को कोई एक्स्ट्रा सर्विस उपलब्ध कराता है। इसलिए यहां पर टोल विवादित और गैरकानूनी है।

क्या होगा अगर ईरान टोल लगाएगा?

अगर ईरान होर्मुज पर टोल लगाने की कोशिश करता है, तो यह सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं होगा। यह ग्लोबल पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल लॉ और ऑयल मार्केट को हिला देने वाला कदम होगा।यानी मामला सिर्फ टोल का नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के ट्रेड सिस्टम के बैलेंस का है।

इस एक्सप्लेनर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।



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