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Operation Sindoor: राफेल का वो दांव, जिसने पाकिस्तानी रडार को बना दिया अंधा, पूर्व अमेरिकी पायलट का खुलासा


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oi-Sumit Jha

Operation Sindoor: अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इसका मकसद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को तबाह करना था। इस सैन्य कार्रवाई में भारतीय वायुसेना के राफेल जेट्स ने अहम भूमिका निभाई। पूर्व अमेरिकी पायलट रयान बोडेनहाइमर ने इस मिशन में भारत की रणनीति और राफेल की आधुनिक तकनीक की जमकर तारीफ की है।

उन्होंने बताया कि कैसे भारतीय पायलटों ने अपनी समझदारी और ‘X-GUARD’ जैसे एडवांस सिस्टम से दुश्मन को पूरी तरह उलझा दिया और बिना किसी नुकसान के मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

Operation Sindoor

राफेल का ‘शतरंज’ जैसा दिमाग

रयान बोडेनहाइमर ने भारतीय पायलटों की रणनीति को ‘4D चेस’ यानी दिमाग का खेल बताया है। उनके अनुसार, आधुनिक युद्ध केवल विमान उड़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि दुश्मन के रडार को धोखा देने के बारे में भी है। भारतीय पायलटों ने राफेल की इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का ऐसा इस्तेमाल किया कि पाकिस्तानी सेना यह समझ ही नहीं पाई कि असली विमान कहां है। यह मिशन तकनीकी श्रेष्ठता और बेहतरीन प्लानिंग का एक बेजोड़ नमूना बनकर उभरा है।

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X-GUARD: हवा में सुरक्षा कवच

राफेल में लगा ‘X-GUARD’ एक टोव्ड डिकॉय (Towed Decoy) सिस्टम है। यह एक छोटा उपकरण होता है जो विमान के पीछे एक तार के जरिए हवा में लटका रहता है। जब दुश्मन की मिसाइल आती है, तो यह डिकॉय ऐसे सिग्नल भेजता है जिससे वह मिसाइल को असली विमान से बड़ा और जरूरी टारगेट लगने लगता है। इसके कारण दुश्मन की मिसाइल विमान को छोड़कर उस छोटे से उपकरण से टकरा जाती है और विमान पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

ड्रॉप टैंक्स और भ्रम की रणनीति

युद्ध के दौरान जब विमानों के बीच मुकाबला कड़ा होता है, तो पायलट अपने अतिरिक्त ईंधन टैंक (Drop Tanks) गिरा देते हैं ताकि विमान हल्का और तेज हो सके। बोडेनहाइमर ने बताया कि जब ये टैंक नीचे गिरे, तो पाकिस्तानी सेना को लगा कि उन्होंने भारत के विमान गिरा दिए हैं। भारत ने जानबूझकर इस भ्रम को बने रहने दिया। इससे दुश्मन खुश होकर रुक गया और उसने दूसरी मिसाइल नहीं दागी, जिसका फायदा उठाकर भारतीय पायलट सुरक्षित वापस लौट आए।

‘फॉग ऑफ वॉर’ और दिमागी खेल

युद्ध के मैदान में ‘फॉग ऑफ वॉर’ यानी अनिश्चितता का माहौल बनाना बहुत जरूरी होता है। भारत ने अपनी संचार रणनीति से पाकिस्तान को इसी उलझन में रखा। जब दुश्मन को लगता है कि उसने शिकार कर लिया है, जबकि असल में वह केवल बेकार कचरे (डिकॉय या टैंक) पर वार कर रहा होता है, तो उसका आत्मविश्वास डगमगा जाता है। इससे भविष्य में वे अपने ही रडार के डेटा पर भरोसा करने से डरने लगते हैं।

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ऑपरेशन सिंदूर का मुख्य लक्ष्य

ऑपरेशन सिंदूर का मकसद बदला लेना नहीं, बल्कि आतंकियों के बुनियादी ढांचे को जड़ से उखाड़ना था। खुफिया जानकारी के आधार पर नौ बड़े आतंकी कैंपों को निशाना बनाया गया। इस पूरी कार्रवाई में भारतीय सेना ने नैतिकता का पालन किया और पूरी कोशिश की कि आम नागरिकों को कोई नुकसान न पहुँचे। यह ऑपरेशन भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और सटीक रणनीति का प्रतीक है, जिसने दुनिया को दिखाया कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।



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