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China-Taiwan Conflict: अचानक चीन ने 40 दिनों के लिए बंद किया अपना एयरस्पेस, क्या ताइवान पर हमले की है तैयारी?


International

oi-Sumit Jha

China Taiwan conflict: ईरान और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, चीन की हालिया गतिविधियों ने पूरी दुनिया का ध्यान ताइवान की ओर खींच लिया है। चीन ने बिना किसी ठोस कारण के 40 दिनों के लिए अपने हवाई क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को बंद कर दिया है, जिसे विशेषज्ञ बेहद असामान्य मान रहे हैं।

ताइवान के पास चीनी युद्धपोतों और फाइटर जेट्स की बढ़ती मौजूदगी ने इस आशंका को जन्म दे दिया है कि क्या बीजिंग वैश्विक अस्थिरता का फायदा उठाकर ताइवान पर कोई बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है।

China Taiwan conflict

China airspace Closure: 40 दिनों की रहस्यमयी पाबंदी

चीन ने 27 मार्च से 6 मई तक के लिए ‘नोटिस टू एयर मिशन्स’ (NOTAM) जारी किया है। आमतौर पर सैन्य अभ्यास के लिए हवाई क्षेत्र को सिर्फ 1 से 3 दिनों के लिए बंद किया जाता है, लेकिन 40 दिनों की यह लंबी अवधि किसी बड़े खतरे या गुप्त मिशन का संकेत देती है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, बिना किसी आधिकारिक अभ्यास की घोषणा के इतने लंबे समय तक आसमान को ब्लॉक करना चीन की किसी नई और खतरनाक मिसाइल तकनीक के परीक्षण या बड़े युद्ध अभ्यास की तैयारी हो सकती है।

Iran war impact on Taiwan: ताइवान की सीमा में चीनी घुसपैठ

ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) ने हाल ही में अपने इलाके में चीनी सैन्य विमानों, नौसैनिक जहाजों और सरकारी जहाजों की भारी मौजूदगी दर्ज की है। चीन के फाइटर जेट्स ने ‘मीडियन लाइन’ (दोनों देशों के बीच की अनौपचारिक सीमा) को पार कर ताइवान के हवाई रक्षा क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश किया। यह घुसपैठ न केवल ताइवान की संप्रभुता को चुनौती देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि चीन लगातार ताइवान की रक्षा तैयारियों और प्रतिक्रिया देने की क्षमता को परखने में जुटा है।

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क्या यह युद्ध की रिहर्सल है?

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ (PLA) की युद्धक क्षमताओं को जांच रहा है। इस 40 दिन के ब्लॉक के दौरान वायुसेना, नौसेना और मिसाइल फोर्स का संयुक्त अभ्यास होने की संभावना है। इसे ‘सर्फेस-टू-एयर’ इंटरैक्शन कहा जाता है, जिसमें जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और विमानों के बीच तालमेल बिठाया जाता है। यह सब ताइवान को डराने और भविष्य में संभावित हमले की एक बड़ी ‘फुल-स्केल रिहर्सल’ जैसा दिखाई दे रहा है।

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ईरान संकट और चीन का मौका

दुनिया का ध्यान इस समय ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव पर है। अमेरिका और पश्चिमी देश मध्य पूर्व की स्थिति को संभालने में व्यस्त हैं। इतिहास गवाह है कि जब बड़ी ताकतें एक जगह उलझी होती हैं, तो दूसरे देश अपने क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने की कोशिश करते हैं। चीन का यह कदम इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव कम होने पर वह ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में अपनी स्थिति और मजबूत कर सके।

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चीन-ताइवान विवाद की जड़ें

चीन ताइवान को अपना एक प्रांत मानता है और उसने 2027 तक इसे मुख्य भूमि में मिलाने का लक्ष्य रखा है। दूसरी ओर, ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश मानता है जिसकी अपनी सरकार और सेना है। 1949 के गृहयुद्ध के बाद से ही दोनों के बीच विवाद बना हुआ है। हाल के वर्षों में चीन ने ताइवान पर दबाव बढ़ाने के लिए सैन्य और आर्थिक हथकंडे अपनाए हैं, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में युद्ध का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।



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