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RBI: 16 लाख बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट के वेतन में आएगी एकरूपता, आरबीआई ने जारी किए नए ड्राफ्ट नियम


दूरदराज के इलाकों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने वाले लाखों बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) के लिए एक जरूरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को इस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। नए ड्राफ्ट नियमों में आरबीआई ने बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट को उनके काम के आधार पर दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटने और उनके वेतन (कमीशन) तय करने में एकरूपता लाने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

ब्रांच ऑथराइजेशन पर जारी इन नए ड्राफ्ट नियमों में ग्राहकों तक सेवाएं पहुंचाने वाले पॉइंट या ‘डिलीवरी पॉइंट’ को तीन स्पष्ट श्रेणियों में परिभाषित किया गया है:


  • बैंक शाखाएं

  • बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट-बैंकिंग आउटलेट 

  • बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट-बैंकिंग टचपॉइंट 

इन कॉरेस्पोंडेंट्स को विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रिटेल बैंकिंग संचालन के लिए तैनात किया जाता है। इसके जरिए बैंकों की पहुंच का विस्तार होता है और देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में काफी मदद मिलती है।

मौजूदा हालात बदलने में कैसे मिलेगी मदद?

आरबीआई का यह नया कदम बीसी इकोसिस्टम में उन्हें मिलने वाले कमीशन या पारिश्रमिक भुगतान के मामले में एकरूपता लाने का अहम प्रयास है। वर्तमान में स्थिति यह है कि इन बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के बीच कोई स्पष्ट वर्गीकरण नहीं है और उन्हें मिलने वाला कमीशन भी अलग-अलग बैंकों में भिन्न होता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो, जून 2025 तक देश भर में विभिन्न ऋणदाताओं की ओर से 16 लाख से अधिक बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स को काम पर रखा गया था, जिन्हें इस नए नियम से सीधा फायदा मिलेगा।

पात्रता आसान बनाने से जुड़ी समिति की सिफारिशें

केंद्रीय बैंक की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, नए ड्राफ्ट नियमों में बीसी (BCs) को नियुक्त करने के लिए निर्धारित पात्रता मानदंडों को पहले से अधिक सरल बनाने का भी प्रस्ताव है। इसके साथ ही, बिजनेस फैसिलिटेटर या बीएफ को भी अब इसी बीसी मॉडल के अंतर्गत शामिल कर लिया जाएगा। 



यह नया ड्राफ्ट एक विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है। इस समिति में रिजर्व बैंक, वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस), भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और नाबार्ड (नाबार्ड) के अधिकारी शामिल थे। इस समिति ने बीसी के संचालन की व्यापक जांच करने के बाद उनकी कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए अपनी सिफारिशें दी थीं।



गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने शुरुआत में अपनी फरवरी की मौद्रिक नीति में इन ड्राफ्ट नियमों की घोषणा की थी। अब आरबीआई ने विनियमित संस्थाओं, आम जनता और अन्य सभी हितधारकों से इन प्रस्तावित नियमों पर 5 मई 2026 तक अपनी टिप्पणियां और सुझाव मांगे हैं।





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