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Iran-US War Ceasefire: Trump ने Pakistan की अपील मानी, 14 दिन तक रुकेगी US बमबारी, Iran खामोश क्यों?


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Iran-US War Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दिए गए अपने 48 घंटे के अल्टीमेटम के खत्म होने के मात्र 1 घंटे पहले बड़ा ऐलान किया। ट्रंप ने 8 अप्रैल की सुबह 4 बजे के करीब (भारतीय वक्त) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अपील मानते हुए दो सप्ताह (14 दिन) के लिए ईरान पर सभी बमबारी और सैन्य हमले निलंबित करने की घोषणा कर दी।

यह दोतरफा युद्धविराम होगा, लेकिन शर्त साफ है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित रूप से खोलना होगा। हालांकि, अभी तक ईरान की ओर से अभी तक कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है। आइए विस्तार से जानते हैं ट्रंप ने क्या-क्या लिखा?

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ट्रंप ने लिखा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बातचीत के आधार पर… मैं ईरान पर बमबारी और हमले को दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हूं, बशर्ते ईरान होर्मुज को पूरी तरह खोल दे। यह दोतरफा युद्धविराम होगा। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका सभी सैन्य उद्देश्य पूरे कर चुका है और उनसे आगे निकल चुका है। उन्होंने ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को ‘व्यावहारिक आधार’ बताया और कहा कि दोनों पक्ष दीर्घकालिक शांति के समझौते की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। दो हफ्ते का समय समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने के लिए है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता: आखिरी घंटे का दांव काम आया

ट्रंप का सीजफायर ऐलान पाकिस्तान की 11वें घंटे की अपील के ठीक बाद आया। शहबाज शरीफ ने X पर पोस्ट कर ट्रंप से डेडलाइन दो हफ्ते बढ़ाने और ईरान से होर्मुज खोलने की गुजारिश की थी। पाकिस्तान ने इसे ‘सद्भावना का प्रतीक’ बताया और सभी पक्षों से दो हफ्ते का युद्धविराम मानने की अपील की।

ट्रंप ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि यह फैसला पाकिस्तान की मध्यस्थता पर आधारित है। पाकिस्तान की अपनी मजबूरी भी साफ है। देश का 90% तेल होर्मुज से गुजरता है। अगर जलडमरूमध्य बंद रहा तो ईंधन संकट गहरा जाएगा, कीमतें बढ़ेंगी और अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

ट्रंप का रणनीतिक गणित: क्यों सहमत हुए?

ट्रंप ने कहा, ‘हम पहले ही सभी सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर चुके हैं।’ यानी अमेरिका-इजरायल के हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुंचा दिया है। अब आगे बढ़ने के बजाय फेस-सेविंग और कूटनीतिक जीत हासिल करना बेहतर समझा गया। ट्रंप ने इसे ‘दीर्घकालिक समस्या का समाधान’ बताया और मध्य पूर्व में स्थायी शांति का दावा किया। ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव (जिसमें सुरक्षित जहाजरानी, पुनर्निर्माण और प्रतिबंध हटाने जैसे मुद्दे शामिल हैं) को आधार मानकर दो हफ्ते का समय दिया गया है। यह फैसला ट्रंप की पुरानी स्टाइल से मेल खाता है कि कड़ी धमकी, फिर आखिरी वक्त पर समझौता। इससे पहले उन्होंने कई बार डेडलाइन बढ़ाई थी।

यह दो हफ्ते निर्णायक साबित हो सकते हैं। अगर ईरान होर्मुज खोल देता है तो तनाव कम होगा। अगर नहीं, तो ट्रंप की धमकी दोबारा गूंज सकती है। ट्रंप ने कहा, ‘मुझे गर्व है कि हम दीर्घकालिक समाधान के करीब हैं।” लेकिन असली परीक्षा ईरान की चुप्पी टूटने के बाद होगी। दुनिया की नजर अब तेहरान के अगले बयान और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर है। कूटनीति ने एक और मौका पाया है कि लेकिन यह मौका कितना ठोस है, यह अगले 14 दिनों में तय होगा।



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