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oi-Kumari Sunidhi Raj
Iran US War: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के कई देशों को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। करीब एक महीने से ज्यादा समय तक चले भीषण रक्तपात, विनाशकारी मिसाइल हमलों और अनिश्चितता के काले बादलों के बाद आखिरकार ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच Ceasefire (युद्धविराम) पर सहमति बन गई है। हालांकि, बंदूकों की गूंज शांत होने के बावजूद इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सीने पर जो गहरे घाव दिए हैं, उनकी भरपाई में दशकों का समय लगेगा।
ताजा आर्थिक विश्लेषण के आंकड़े डरावने हैं। इस युद्ध ने दुनिया को अब तक करीब 54.88 लाख करोड़ रुपये ($6.6 ट्रिलियन) का वैश्विक आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। युद्ध की इस लपट ने न केवल पश्चिम एशिया के भूगोल को झुलसाया, बल्कि न्यूयॉर्क के वॉल स्ट्रीट से लेकर मुंबई के दलाल स्ट्रीट तक के बाजारों को धराशायी कर दिया। कच्चे तेल की कीमतें $69 से रॉकेट की तरह उछलकर $125.88 प्रति बैरल तक जा पहुंचीं, जिसने दुनिया भर में महंगाई का एक ऐसा विस्फोट किया है जिससे उबरना फिलहाल नामुमकिन नजर आ रहा है।

ईरान को बड़ा नुकसान, GDP 10% गिरने का अनुमान
युद्ध का मुख्य अखाड़ा रहा ईरान आज खंडहरों के ढेर पर खड़ा है। यहां का आधुनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।
भीषण मानवीय क्षति: रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में अब तक 7,300 से अधिक मौतें हुई हैं और 25,000 से ज्यादा लोग घायल हैं। इन मौतों में इस्लामिक रिपब्लिक के नेता अली ख़ामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ जनरल भी शामिल हैं।
विरासत और विकास का अंत: आधुनिक अस्पताल, स्कूल और कई ऐतिहासिक इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं।
आर्थिक मंदी: युद्ध के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था में 10% से ज्यादा की गिरावट दर्ज होने का खतरा मंडरा रहा है।
सुपरपावर अमेरिका पर पड़ा सैन्य खर्च का बोझ
इस त्रिकोणीय संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न होकर भी अमेरिका को भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी है।
तत्काल खर्च: युद्ध के दौरान अब तक $80.4 बिलियन (करीब 7.49 लाख करोड़ रुपये) सीधे खर्च हुए हैं।
भविष्य की मार: विशेषज्ञों का मानना है कि सामरिक और सैन्य नुकसान का कुल आंकड़ा $210 बिलियन तक पहुंच सकता है।
व्यापारिक नुकसान: व्यापार में आई रुकावटों की वजह से अमेरिका को $115 बिलियन की अलग से चोट लगी है।
इजरायल के राजस्व को $15 बिलियन की चपत
इजरायल के लिए यह जंग जान-माल के मोर्चे पर बेहद नुकसानदेह साबित हुई है।
बड़ी जनहानि: संघर्ष में 33,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 7,100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
आर्थिक दबाव: युद्ध संचालन और ध्वस्त हुए बुनियादी ढांचे की वजह से इजरायल को अब तक $15 बिलियन का राजस्व घाटा हुआ है।
99% खाड़ी क्षेत्र में पानी का संकट, ठप होते शहर
दुनिया के ऊर्जा केंद्र कहे जाने वाले खाड़ी देशों में इस युद्ध ने जीवन की बुनियादी जरूरत ‘पानी’ पर हमला किया है। यहां के 99% पानी की आपूर्ति ‘डीसैलिनेशन’ प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र) से होती है, जो युद्ध के कारण ठप हो गए। इससे पूरे क्षेत्र में पानी का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है।
भारत में निवेशकों के 37 लाख करोड़ डूबे, पेट्रोल-डीजल पर मार
भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी इस संघर्ष की आंच से बुरी तरह झुलस गए हैं।
शेयर बाजार में तबाही: विदेशी निवेशकों की घबराहट के चलते बाजार से भारी निकासी हुई, जिससे भारतीय निवेशकों के 37 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
ईंधन की किल्लत: कच्चे तेल की कीमतों ने घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए। LPG की कमी के कारण गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं।
सरकारी घाटा: जनता को राहत देने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की, जिससे सरकारी खजाने को 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दुनिया भर में ‘एनर्जी इमरजेंसी’ और कड़े प्रतिबंध
सप्लाई चेन टूटने से कई देशों में स्थितियां बेकाबू हो गईं:
पाकिस्तान व श्रीलंका: पाकिस्तान में स्कूल बंद कर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया गया, वहीं श्रीलंका में हर बुधवार सरकारी छुट्टी का ऐलान कर दिया गया।
फिलीपींस: देश में औपचारिक रूप से ‘नेशनल एनर्जी इमरजेंसी’ लगा दी गई है।
चीन: बीजिंग ने अपने घरेलू भंडार को सुरक्षित करने के लिए ईंधन निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
इंडस्ट्री और खेती पर ‘डबल अटैक’
मैन्युफैक्चरिंग: एथिलीन 35% और एक्रिलिक एसिड 30% तक महंगा हुआ है। गुजरात के टेक्सटाइल हब में इनपुट लागत 50% बढ़ने से पॉलिएस्टर के दाम 15% बढ़ गए।
खाद्य सुरक्षा: उर्वरकों (Fertilizers) की भारी किल्लत ने वैश्विक स्तर पर फूड इन्फ्लेशन (खाद्य महंगाई) का खतरा पैदा कर दिया है, जिससे आने वाले समय में अनाज की कमी हो सकती है।
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