Homeव्यवसायRBI MPC: रेपो रेट 5.25% पर स्थिर; विकास दर, महंगाई और फॉरेक्स...

RBI MPC: रेपो रेट 5.25% पर स्थिर; विकास दर, महंगाई और फॉरेक्स रिजर्व पर गवर्नर क्या बोले? जानें हर जरूरी बात


भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की हालिया बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की गई। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक ने स्थिरता और सतर्कता को अपनी नीति का मुख्य आधार बनाया है। नीतिगत ब्याज दरों से लेकर विदेशी मुद्रा भंडार और एनबीएफसी की स्थिति तक, इस बैठक में लिए गए प्रमुख फैसलों के बारे में जानें। 

1. नीतिगत दरों पर रिजर्व बैंक का रुख


  • मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से न्यूट्रल रुख अपनाते हुए नीतिगत ब्याज दर पर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया। 

  • इस फैसले के तहत, रेपो रेट बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

  • तरलता प्रबंधन को लेकर रिज़र्व बैंक भविष्य में सक्रिय और पूर्व-सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएगा।

2. महंगाई और आर्थिक विकास 


  • चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

  • इसके साथ ही, हेडलाइन मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।

  • निकट भविष्य के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतों का आउटलुक आरामदायक स्थिति में है।

  • हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में हालिया उछाल महंगाई के लिए एक संभावित जोखिम बनकर सामने आया है।

  • वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी (जीडीपी) विकास दर 6.9 प्रतिशत अनुमानित है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है।

  • उच्च-आवृत्ति संकेतक दर्शाते हैं कि देश की आर्थिक गतिविधि और इसकी गति निरंतर बनी हुई है।

3. वैश्विक चुनौतियां और उनका असर


  • आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्तमान में अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है।

  • लगातार चल रहे संघर्षों के कारण पैदा हुई भारी अनिश्चितता आर्थिक दृष्टिकोण पर भारी पड़ रही है।

  • उच्च ऊर्जा कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से आर्थिक विकास के प्रभावित होने की आशंका है।

  • इन बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए निरंतर निगरानी आवश्यक हो गई है।

  • रिजर्व बैंक उभरती हुई स्थिति पर कड़ी नजर रखेगा और ऐसी नीतियां लागू करेगा जो अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दें।

4. विदेशी मुद्रा, रुपया और बाजार


  • 3 अप्रैल तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 696.1 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर पहुंच गया है।

  • मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक बुनियादी ढांचे के बावजूद, पिछले साल भारतीय रुपये में पिछले वर्षों के औसत की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई। 

  • आरबीआई की विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, और बाज़ार में अस्थिरता रोकने के लिए बैंक हस्तक्षेप जारी रखेगा।

  • रेमिटेंस में अपेक्षित मजबूती के कारण चालू खाता घाटा को मध्यम और एक टिकाऊ स्तर पर रखने में मदद मिलेगी।

  • भारत अभी भी ग्रीनफील्ड एफडीआई परियोजनाओं के लिए दुनिया का एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।

5. बैंकिंग और एनबीएफसी 


  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बुनियादी मानक बेहद मजबूत हैं।

  • एनबीएफसी सेक्टर पूंजी के मोर्चे पर मजबूत है। यह बेहतरीन लिक्विडिटी और ग्रॉस एनपीए में हुए सुधार के साथ काम कर रहा है।

आरबीआई की यह मौद्रिक नीति बताती है कि वैश्विक स्तर पर व्याप्त तनाव और ऊर्जा संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। 696.1 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार, नियंत्रण में महंगाई दर और एनबीएफसी सेक्टर की मजबूती सकारात्मक संकेत हैं। रिज़र्व बैंक का न्यूट्रल रुख और यथास्थिति का फैसला यह सुनिश्चित करता है कि नीति निर्माता किसी भी वैश्विक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सतर्क हैं।





Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments