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‘US Ceasefire चुने या इजरायल के जरिए युद्ध जारी रखे’, ईरान ने Lebanon हमलों के बीच होर्मुज फिर बंद किया


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US-Israel-Iran Ceasefire, Iran Closes Hormuz: अमेरिका-ईरान के बीच 8 अप्रैल की सुबह करीब 4 बजे (भारतीय वक्त) घोषित 14 दिन के युद्धविराम के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह बंद कर दिया। ईरान का साफ कहना है कि लेबनान पर इजरायल के हमलों को वह युद्धविराम का उल्लंघन मानता है।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने X पर तीखा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका को या तो युद्धविराम चुनना होगा या इजरायल के माध्यम से युद्ध जारी रखना होगा। दोनों एक साथ नहीं हो सकते। पूरी दुनिया लेबनान में हो रहे नरसंहार को देख रही है। अब गेंद अमेरिका के पाले में है। होर्मुज क्यों बंद हुआ? अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या है? पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्या असर पड़ेगा? और पूरा मध्य पूर्व एक बार फिर क्यों आग की चपेट में है? समझें …

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ईरान का कड़ा जवाब: होर्मुज फिर बंद

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत बंद कर दिया। ईरान इसे युद्धविराम की स्पष्ट तोड़ मान रहा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर जनरल सैयद माजिद मूसावी ने X पर लिखा कि लेबनान पर आक्रामकता ईरान पर आक्रामकता है। हम कड़ी प्रतिक्रिया देंगे। होर्मुज बंद होने से दुनिया का 20% तेल व्यापार एक बार फिर ठप हो गया है।

व्हाइट हाउस का तीखा पलटवार: ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’

अमेरिकी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पत्रकारों से कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। हम ईरान से मांग करते हैं कि इसे तत्काल, शीघ्र और सुरक्षित रूप से फिर से खोल दिया जाए। राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से भी यही अपेक्षा दोहराई गई है।

अराघची का सख्त संदेश: ‘दुनिया देख रही है’

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायली हमलों की कड़ी निंदा करते हुए लिखा कि ईरान-अमेरिका युद्धविराम की शर्तें स्पष्ट हैं। अमेरिका को या तो युद्धविराम चुनना होगा या इजरायल के जरिए युद्ध जारी रखना होगा। वह दोनों नहीं कर सकता। पूरी दुनिया लेबनान में हो रहे नरसंहार को देख रही है। अब गेंद अमेरिका के पाले में है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता: शुक्रवार को इस्लामाबाद वार्ता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने युद्धविराम की घोषणा का स्वागत किया था और दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल (शुक्रवार) को इस्लामाबाद बुलाया है। शरीफ ने X पर लिखा कि दोनों देशों ने असाधारण सूझबूझ दिखाई। हम ‘इस्लामाबाद वार्ता’ से स्थायी शांति की उम्मीद करते हैं। लेकिन कुछ घंटों बाद शरीफ ने खुद स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में युद्धविराम का उल्लंघन हुआ है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।

14 दिन का सीजफायर अभी भी कागजी साबित हो रहा है। ईरान का होर्मुज बंद करना और अराघची का ‘गेंद अमेरिका के पाले में’ वाला बयान दर्शाता है कि अगले 48 घंटे बेहद निर्णायक हैं। थिति घंटे-घंटे बदल रही है। क्या अमेरिका इजरायल पर लगाम लगाएगा? या होर्मुज फिर से आग उगलेगा?



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