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oi-Sohit Kumar
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) समझौते के बाद अब अपना रुख वापस ‘ग्रीनलैंड’ (Greenland) की ओर मोड़ दिया है। पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान सहयोग न मिलने पर उन्होंने NATO सहयोगियों पर तीखा हमला बोला है।
ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि मुश्किल वक्त में जिन देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया, अब उन्हें इसका अंजाम भुगतना पड़ सकता है। ट्रम्प का इशारा साफ है- अगर मित्र देश सुरक्षा में साथ नहीं देंगे, तो अमेरिका भी अपने रणनीतिक हितों के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। आइए जानतें हैं राष्ट्रपति ट्रम्प के इस कड़े रुख के पीछे की असली वजह क्या है?

क्या है NATO, क्यों गद्दारी का आरोप लगा रहे हैं ट्रम्प?
NATO यानी ‘नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन’ एक शक्तिशाली सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी। इसमें अमेरिका के साथ-साथ ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे 32 देश शामिल हैं। इस संगठन का सबसे बड़ा नियम है ‘सामूहिक सुरक्षा’, यानी अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे सभी देशों पर हमला माना जाएगा और सब मिलकर जवाब देंगे।
ट्रम्प का आरोप है कि जब अमेरिका ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति में था, तब इस संगठन ने केवल तमाशा देखा और अमेरिका को अकेला छोड़ दिया। ट्रम्प के अनुसार, NATO देश अमेरिका के पैसे और सेना पर तो ऐश कर रहे हैं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर पीछे हट जाते हैं।
क्यों सनक गए हैं राष्ट्रपति?
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘जब हमें ज़रूरत थी तब NATO हमारे साथ नहीं था, और अगर फिर ज़रूरत पड़ी तो वे नहीं होंगे। ग्रीनलैंड को याद रखें, वह बड़ा, खराब ढंग से चलाया जा रहा, बर्फ का टुकड़ा!!!’
दरअसल, ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है जो डेनमार्क के अधीन आता है। ट्रम्प इसे अमेरिकी कंट्रोल में लाना चाहते हैं। इसके पीछे की असली वजह वहां छिपे बेशकीमती खनिज संसाधन और रूस-चीन के खिलाफ इसकी भौगोलिक स्थिति है। ट्रम्प का मानना है कि जो देश उनकी सैन्य मदद नहीं कर रहे, उनके संसाधनों पर अमेरिका का अधिकार होना चाहिए।
अमेरिका के सहयोगियों को मिली फटकार
यह पूरा विवाद उस समय गरमाया है जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में सीधी बातचीत होने वाली है। हफ़्तों की भीषण जंग के बाद अब शांति की उम्मीद तो जगी है, लेकिन ट्रम्प की नाराज़गी कम नहीं हुई है। व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने जमकर भड़ास निकाली।
उन्होंने कहा कि जापान में 50,000 और दक्षिण कोरिया में 45,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, लेकिन इन देशों ने ईरान संकट में अमेरिका की कोई मदद नहीं की। ट्रम्प की यह बयानबाजी अब यूरोपीय देशों के लिए खतरे की घंटी बन गई है, क्योंकि अगर अमेरिका NATO से पीछे हटता है, तो पूरी दुनिया का सुरक्षा ढांचा ढह सकता है।
क्या फिर शुरू होगी नई ट्रेड वॉर?
ट्रम्प की इस धमकी के बाद यूरोपीय संघ (EU) में डर का माहौल है। फ्रांस और जर्मनी जैसे देश अब अपनी अलग सेना बनाने और सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भरता कम करने की बात कर रहे हैं। ट्रम्प पहले भी ग्रीनलैंड के संसाधनों तक पहुंच बनाने के लिए ट्रेड वॉर की धमकी दे चुके हैं। अब जबकि ईरान के साथ मोर्चा शांत हुआ है, तो ट्रम्प ने अपना पूरा ध्यान ग्रीनलैंड और उन खनिज संपदाओं पर लगा दिया है जो भविष्य की तकनीक के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती हैं।
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