सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (16 अप्रैल) को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करे। इसमें उन वोटर्स को शामिल किया जाए, जिनकी अपीलों पर ट्रिब्यूनल में फैसला हो गया है। कोर्ट ने कहा कि जिनकी अपीलें पेंडिंग हैं, उन्हें वोट डालने की इजाजत नहीं होगी। बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 90.83 लाख वोटर्स के नाम काट दिए गए हैं। इन वोटर्स की अपील सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए दो फेज में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग होना है। पहले फेज में जहां वोटिंग होना है वहां 21 अप्रैल तक वोटर्स की अपील पर फैसला हो जाने पर वे वोट दे सकेंगे। वहीं दूसरे फेज वाले इलाकों के वोटर्स 27 अप्रैल तक अपील पर फैसला होने पर वोट डाल सकेंगे। जैसे ही ट्रिब्यूनल नाम जोड़ने का आदेश देगा, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत सूची में संशोधन करे। CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।
ट्रिब्यूनल पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जाना चाहिए 19 ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख से ज्यादा अपीलें सुनवाई के दौरान बताया गया कि 19 ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित हैं। ये ट्रिब्यूनल रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की अगुवाई में बनाए गए हैं। पश्चिम बंगाल में SIR अभियान का मकसद वोटर लिस्ट से डुप्लिकेट और अयोग्य नाम हटाना बताया जा रहा है। हालांकि इस पर सियासी विवाद तेज है। सत्ताधारी पार्टी ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं को बाहर करने का आरोप लगाया है, जबकि ECI इसे निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी बता रहा है।
बंगाल में 11.85% नाम हटे, ज्यादातर बांग्लादेश बॉर्डर के पास पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85% वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं। चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे। 8 अप्रैल: TMC चुनाव आयोग से मिला, आरोप- भगा दिया गया 8 अप्रैल को सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में TMC का प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा था। लेकिन बैठक के बाद डेरेक ने कहा कि हमने SIR के मुद्दे पर समय मांगा था, लेकिन मीटिंग के दौरान हमारे साथ खराब व्यवहार किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने हमें सिर्फ 5 मिनट में भगा दिया। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, डेरेक ओ’ब्रायन ने CEC को बोलने से रोका और धमकी दी। वह कोई बात सुन ही नहीं रहे थे। —————————————————– ये खबर भी पढें… पश्चिम बंगाल में SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा:नई वोटर लिस्ट से CM ममता की परेशानी बढ़ी, 50 सीटों पर TMC को ज्यादा चुनौती 8 अप्रैल की सुबह बूंदाबांदी के बीच करीब सुबह 10:25 बजे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समर्थकों के हुजूम के साथ पैदल ही हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं। पूरी खबर पढे़ं…
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सुप्रीम कोर्ट बोला- बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट बने: ट्रिब्यूनल जिन्हें 21 अप्रैल तक वोटर मानेगा, वो 23 को वोट डाल सकेंगे
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