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सेबी का बड़ा कदम: सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर एनपीओ के लिए नियमों में ढील, फंड जुटाना हुआ आसान


पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) को बढ़ावा देने के लिए कई अहम सुधार लागू किए हैं। बुधवार को जारी एक सर्कुलर में, सेबी ने नॉट-फॉर-प्रॉफिट संगठनों (एनपीओ) के लिए रजिस्ट्रेशन की वैधता बढ़ाने और फंड जुटाने की शर्तों को आसान बनाने की घोषणा की है। इन कदमों का मुख्य उद्देश्य बाजार में सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाना और उनके लिए धन जुटाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

रजिस्ट्रेशन की अवधि में विस्तार

नियामक ने बिना फंड जुटाए सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकृत रहने की सीमा को बढ़ा दिया है। पहले यह सीमा दो साल थी, जिसे अब बढ़ाकर अधिकतम तीन साल कर दिया गया है। सेबी ने यह फैसला एनपीओ द्वारा सामना की जाने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, जैसे वैधानिक और विनियामक मंजूरियों में होने वाली देरी, को ध्यान में रखते हुए लिया है। 

नए नियमों के अनुसार, कोई भी एनपीओ पंजीकरण की तारीख से दो साल तक बिना फंड जुटाए एक्सचेंज पर पंजीकृत रह सकता है। इसके बाद, सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) की मंजूरी के साथ इस अवधि को एक अतिरिक्त वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।

फंड जुटाने की सीमा में कटौती

एनपीओ के लिए फंडरेजिंग में लचीलापन लाने के लिए, सेबी ने ‘जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल’ (जेडसीजेडपी) इंस्ट्रूमेंट्स के लिए न्यूनतम सब्सक्रिप्शन की आवश्यकता को 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, नियामक ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी जहां लागत और परिणामों को प्रति-इकाई के आधार पर स्पष्ट रूप से लागू किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आंशिक फंड मिलने से प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

सख्त निगरानी और रिफंड की शर्त

सेबी के दिशानिर्देशों के तहत, आंशिक फंडरेजिंग वाले मामलों में इन-प्रिंसिपल मंजूरी देने से पहले सोशल स्टॉक एक्सचेंज को उचित जांच करनी होगी। एक्सचेंज को यह सुनिश्चित करना होगा कि जुटाए गए फंड का सार्थक तरीके से उपयोग किया जा सके और प्रोजेक्ट के उद्देश्य व्यावहारिक बने रहें। इसके अलावा, यदि तय न्यूनतम सब्सक्रिप्शन प्राप्त नहीं होता है, तो निवेशकों का पैसा रिफंड कर दिया जाएगा।

रिटेल निवेशकों की भागीदारी पर जोर

बाजार में खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सेबी लगातार प्रयास कर रहा है। इससे पहले मार्च में भी सेबी बोर्ड ने सोशल इंपैक्ट फंड्स में व्यक्तिगत निवेशकों की भागीदारी आसान करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया था। नियामक ने एनपीओ के लिए फंड जुटाने को सुगम बनाने के उद्देश्य से न्यूनतम निवेश सीमा को 2 लाख रुपये से भारी कटौती करते हुए मात्र 1,000 रुपये कर दिया था। 

अब आगे क्या आउटलुक?

सेबी के इन ताजा सुधारों से सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर निवेश और भागीदारी दोनों के बढ़ने की उम्मीद है। छोटे निवेशकों के लिए निवेश सीमा घटाने और एनपीओ के लिए अनुपालन में ढील देने से भारत में सामाजिक परियोजनाओं के लिए पारदर्शी तरीके से फंड जुटाने के एक नए और सशक्त ढांचे का निर्माण होगा।



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