वित्त मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि डीजीजीआई अधिकारियों ने कपिल चुघ को गिरफ्तार कर लिया है, जिस पर 1,825 करोड़ रुपये के जीएसटी रिफंड धोखाधड़ी का आरोप है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जीएसटी खुफिया निदेशालय (डीजीजीआई) की अहमदाबाद क्षेत्रीय इकाई ने कथित तौर पर जीएसटी रिफंड धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड और कई अन्य आर्थिक आपराधिक मामलों में वांछित चुघ को 19 अप्रैल 2026 को दुबई से लौटने पर आईजीआई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया।
मंत्रालय ने कहा, “चुघ ने जांच से बचने की कोशिश की और अहमदाबाद स्थित डीजीजीआई, एजेडयू द्वारा जारी किए गए कई समन (कुल 22) का जवाब नहीं दिया और कभी भी जांच में शामिल नहीं हुआ। कई अधिकार क्षेत्रों में लगभग 1,825 करोड़ रुपये की जीएसटी रिफंड धोखाधड़ी करने के बाद वह दुबई भाग गया था।”
मामले की जांच से पता चला है कि चुघ ने अपने सहयोगी विपिन शर्मा के साथ मिलकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का धोखाधड़ी से लाभ उठाने और शून्य-रेटेड आपूर्ति के कारण धनवापसी दावों के माध्यम से बाद में इसे भुनाने की व्यवस्था संचालित की थी।
मंत्रालय ने कहा, “कपिल चुघ मुख्य साजिशकर्ता और आदतन आर्थिक अपराधी के रूप में सामने आया है, जिसने फर्जी फर्मों, कर्मचारियों और करीबी सहयोगियों के माध्यम से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित किया।”
स्वदेशी माइक्रो ड्रोन के लिए RFI जारी
सरकार ने भारतीय वायुसेना के विशेष बल गरुड़ के लिए अत्याधुनिक माइक्रो मानवरहित व्हीकल (यूएवी) सिस्टम खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (आरएफआई) जारी किया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह नई ड्रोन प्रणाली ऊंचाई वाले इलाकों में निगरानी और ऑपरेशन के लिए तैयार की जा रही है। यह समुद्र तल से 16,400 फीट तक की ऊंचाई पर काम कर सकेगी और माइनस 20 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी सक्रिय रहेगी। यह ड्रोन दिन और रात दोनों समय निगरानी, लक्ष्य पहचान और रियल टाइम जानकारी देने में सक्षम होगा। इसे हल्का बनाया जाएगा, ताकि दो लोग आसानी से साथ लेकर चल सकें।
जीपीएस के बिना भी काम करने की क्षमता…
नए यूएवी की रेंज कम से कम 15 किमी और उड़ान समय 60 मिनट या उससे अधिक रखने की योजना है। इसमें ऑटोमैटिक टेक-ऑफ और लैंडिंग, सुरक्षित एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन व जीपीएस के बिना भी काम करने की क्षमता होगी। इस प्रोजेक्ट में पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर जोर दिया गया है। सरकार बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी के तहत कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ इसे विकसित करना चाहती है।
ऑपरेशन ऑक्टोपस 2.0 के तहत साइब ठगी पर नकेल, नौ राज्यों में 32 बैंक अधिकारी समेत 52 गिरफ्तार
देशभर में फैले एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क पर हैदराबाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 राज्यों में एक साथ छापे मार 52 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस नेटवर्क में 32 बैंक अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है, जो फर्जी खातों के जरिये ठगी के पैसों के लेनदेन में मदद कर रहे थे। पुलिस आयुक्त वी सी सज्जनार ने बताया कि ऑपरेशन ऑक्टोपस 2.0 के तहत यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तार लोगों में 32 बैंक अधिकारी, 15 म्यूल अकाउंट धारक और 5 बिचौलिए शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि बैंक अधिकारी फर्जी या म्यूल खाते खोलने में मदद करते थे, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसों को इधर-उधर करने में होता था। सात दिन तक चले इस अभियान में महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और बिहार में एक साथ छापे मारे गए। पुलिस के मुताबिक, म्यूल अकाउंट धारक जानबूझकर अपने खाते ठगों को इस्तेमाल करने देते थे, जबकि बिचौलिए इन खातों की व्यवस्था कर पैसे को मुख्य सरगनाओं तक पहुंचाने का काम करते थे।
ऑपरेशन ऑक्टोपस-1 में 117 लोगों को गिरफ्तार किया गया था
पुलिस के अनुसार, हाल के समय में निवेश, ट्रेडिंग और ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ जैसे साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है, जहां अपराधी लोगों को डराकर, बहला-फुसलाकर या दबाव बनाकर पैसे ठगते हैं। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए पहले ऑपरेशन ऑक्टोपस 1 चलाया गया था। उस अभियान के दौरान साइबर क्राइम पुलिस ने 350 संदिग्ध बैंक खातों का नेटवर्क पकड़ा, जिनका संबंध देशभर में दर्ज करीब 850 मामलों से था। इन खातों के जरिये लगभग 150 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। फरवरी में 16 राज्यों में कार्रवाई कर 117 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस 2.0’ शुरू किया गया।



