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नरवणे बोले- चीन गतिरोध में सरकार ने अकेला नहीं छोड़ा: राहुल का दावा था- पीएम पूर्व आर्मी चीफ से बोले थे जो उचित समझो करो


8 मिनट पहले

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पूर्व आर्मी चीफ चीफ जनरल एमएम नरवणे ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहा कि 2020 में चीन के साथ हुए गतिरोध में सरकार ने अकेला नहीं छोड़ा था। सरकार पूरी तरह से सपोर्ट में थी और पूरा अधिकार दिया था कि हालात बिगड़ने पर चीनी सैनिकों पर गोलियां चला सकें।

4 फरवरी को राहुल किताब की कॉपी लेकर संसद पहुंचे। उन्होंने कहा कि अगर आज पीएम आए तो उन्हें यह किताब दूंगा। राहुल ने किताब का वह पेज खोलकर दिखाया, जिसमें लिखा है कि प्रधानमंत्री ने आर्मी चीफ से कहा था- ‘जो उचित समझो वह करो।’

राहुल ने यह भी कहा था, ‘सरकार और रक्षा मंत्री कह रहे है कि किताब का अस्तित्व नहीं है। देखिए यह रही किताब।’ नरवणे की इस अनपब्लिश बुक में चीन के साथ भारतीय सेना की 2020 की झड़पों के साथ-साथ अग्निवीर योजना का रीव्यू किया गया है।

अब पूर्व सेना प्रमुख कि नई किताब ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ आने वाली है।

9 फरवरी को पेंगुइन ने कहा- नरवणे की किताब पब्लिश नहीं हुई

पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश्ड किताब पर 9 फरवरी को पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा था कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई। इसका कोई हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया गया। कंपनी ने कहा कि पब्लिशिंग के सभी राइट्स हमारे पास हैं। अब तक किताब की न तो कोई छपी हुई कॉपी आई है और न ही डिजिटल कॉपी सामने आई है।

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3 फरवरी राहुल बोले- कंपनी या आर्मी चीफ झूठ बोल रहे

राहुल गांधी ने मंगलवार 3 फरवरी को लोकसभा के बाहर कहा था कि- एमएम नरवणे ने X पर पोस्ट किया है, ‘हेलो दोस्तों, मेरी किताब अब अवेलेबल है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग’। या तो एमएम नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन झूठ बोल रहा है। मैंने आर्मी चीफ पर विश्वास करना चुना।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 4 फरवरी को संसद परिसर में पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश किताब को लेकर पहुंचे थे।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 4 फरवरी को संसद परिसर में पूर्व आर्मी चीफ मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश किताब को लेकर पहुंचे थे।

संसद से सामने आए मुद्दे पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की। डिजिटल और दूसरे फॉर्मेट में मैन्युस्क्रिप्ट के गैर-कानूनी सर्कुलेशन की जांच शुरू कर दी।

नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब में ऐसा क्या, जिस पर विवाद हुआ

जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे। उनकी आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में उनके सैन्य करियर के साथ-साथ 2020 के भारत-चीन लद्दाख सीमा विवाद, गलवान घाटी की घटनाएं, अग्निपथ योजना और रणनीतिक निर्णयों का जिक्र बताया गया है।

रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि 31 अगस्त 2020 को पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे पर कैलाश रेंज में हुए डेवलपमेंट के बारे में उनका ब्यौरा, और भारतीय सेना को चीनी उकसावे का जवाब कैसे देना चाहिए, सरकार ने इस पर तुरंत कोई पॉलिटिकल निर्देश नहीं दिया था। यही विवाद की वजह है।

किताब जनवरी 2024 में पब्लिश होनी थी। न्यूज एजेंसी PTI ने दिसंबर 2023 में इसका एक हिस्सा छापा। अग्निवीर स्कीम पर PTI के हिस्से ने विवाद खड़ा कर दिया और डिफेंस मिनिस्ट्री ने नरवणे और पब्लिशर को लिखा कि किताब को पब्लिश करने से पहले आर्मी को क्लियरेंस के लिए सबमिट करें।

आर्मी ने किताब को डिटेल में पढ़ा, उसमें शामिल सब्जेक्ट्स पर अपने ऑब्जर्वेशन रिकॉर्ड किए। आखिरी फैसला लेने के लिए इसे डिफेंस मिनिस्ट्री को भेज दिया। डिफेंस मिनिस्ट्री ने अब तक पूर्व चीफ की किताब को अपनी क्लियरेंस नहीं दी है।

उसी समय, नरवणे ने यह भी ट्वीट (अब X) किया कि उनकी किताब अब उपलब्ध है। उन्होंने अमेजन से एक प्री-ऑर्डर लिंक भी शेयर किया था। 2020 से 2024 के बीच रक्षा मंत्रालय ने 35 पुस्तकों को मंजूरी दी। नरवणे की पुस्तक फिलहाल लंबित मामलों में शामिल बताई जा रही है।

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पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)’ के सर्कुलेशन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सोमवार को FIR दर्ज की है। पूरी खबर पढ़ें…



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