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Credit Card Expense: देश में बढ़ रहा क्रेडिट कार्ड के जरिए खर्च; मार्च में लेनदेन 24% बढ़कर 2194 अरब रुपये हुआ


भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल और क्रेडिट लेनदेन के मोर्चे पर मार्च का महीना शानदार रहा है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में क्रेडिट कार्ड से होने वाले खर्च में मासिक आधार पर 24 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है। इस उछाल के साथ ही देश में कुल क्रेडिट कार्ड स्पेंडिंग 2,194 अरब रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि, इस शानदार आंकड़े के पीछे की तस्वीर कुछ अलग है। विश्लेषकों का मानना है कि यह उछाल मुख्य रूप से मौसमी कारकों और ‘लो-बेस इफेक्ट’ का परिणाम है, जबकि मूल रुझान देश में खपत वृद्धि के सामान्य होने का संकेत दे रहे हैं।

खपत में संरचनात्मक तेजी या मौसमी प्रभाव?

असित सी. मेहता इन्वेस्टमेंट इंटरमीडिएट्स द्वारा किए गए विश्लेषण से इस वृद्धि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होती है। 


  •  रिपोर्ट के अनुसार, यदि सालाना आधार पर मूल्यांकन किया जाए तो विकास दर 8.9 प्रतिशत रही, जो काफी अधिक मॉडरेट या संतुलित है। 

  • विश्लेषकों ने स्पष्ट किया है कि मासिक आधार पर खर्च में आया यह तेज उछाल मांग में किसी संरचनात्मक तेजी को नहीं दर्शाता है। 

  • इसके बजाय, यह मुख्य रूप से मौसमी खर्च के पैटर्न और सांख्यिकीय आधार प्रभावों को दर्शाता है। 

  • वर्तमान में भारतीय क्रेडिट कार्ड सेक्टर अपने उच्च विकास चरण से बाहर निकलकर एक अधिक सामान्य और स्थिर प्रक्षेपवक्र की ओर बढ़ रहा है।

यूजर बेस और नए कार्ड्स: अधिग्रहण से मिल रही है रफ्तार


खर्च के साथ-साथ कार्ड जारी किए जाने के मोर्चे पर उद्योग का विस्तार लगातार जारी है:


  • सक्रिय कार्ड्स की संख्या: देश में कुल सक्रिय क्रेडिट कार्डों की संख्या सालाना आधार पर लगभग 8 प्रतिशत बढ़कर 118 मिलियन के आसपास पहुंच गई है, जो उपयोगकर्ता आधार के स्थिर विस्तार को दिखाता है।

  • नए कार्ड जारी: मार्च महीने में स्वस्थ वृद्धि दर्ज करते हुए लगभग 0.93 मिलियन (9.3 लाख) नए क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 7.96 प्रतिशत की वृद्धि है।

  • ग्रोथ का मुख्य इंजन: इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि उद्योग की मौजूदा वृद्धि प्रति उपयोगकर्ता खर्च में भारी बढ़ोतरी के बजाय, मुख्य रूप से नए ग्राहकों के अधिग्रहण द्वारा संचालित हो रही है।

उपभोक्ताओं का खर्च करने का व्यवहार


समीक्षाधीन अवधि में ग्राहकों के खर्च करने के व्यवहार  ने बाजार को मिले-जुले संकेत दिए हैं। प्रति कार्ड औसत खर्च में मासिक आधार पर 22.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो एक बार फिर मौसमी तेजी को प्रमाणित करती है। हालांकि, सालाना आधार पर यह वृद्धि लगभग स्थिर रही और इसमें मात्र 0.9 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसी तरह, प्रति लेनदेन औसत खर्च में भी मासिक आधार पर तो बढ़ोतरी हुई, लेकिन सालाना आधार पर इसमें गिरावट का रुख जारी रहा। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि ग्राहकों की ‘कंजम्पशन इंटेंसिटी’ या खपत की तीव्रता में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। 



क्रेडिट कार्ड सेक्टर का यह प्रदर्शन पिछले महीने (फरवरी) के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है। गौरतलब है कि फरवरी महीने की रिपोर्ट में क्रेडिट कार्ड खर्च सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़ा था, लेकिन मासिक आधार पर इसमें 11 प्रतिशत की गिरावट आई थी और यह 1,772 अरब रुपये पर आ गया था। फरवरी में 1.05 मिलियन नए कार्ड (सालाना आधार पर 7.7 प्रतिशत की वृद्धि) जारी हुए थे। कुल मिलाकर, मार्च के डेटा यह पुष्टि करते हैं कि भारतीय उपभोक्ता नए क्रेडिट कार्ड तो तेजी से अपना रहे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत खपत अब एक स्थिर और परिपक्व चरण में प्रवेश कर चुकी है।





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