ईरान संकट से उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95 के स्तर से नीचे आ गया है। एसबीआई रिसर्च की सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अगर रुपया 95 के स्तर पर रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार घटकर 4.04 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगा। ऐसे में भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना 2029-30 से पहले पूरा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के समय में बाहरी कारकों और अनियंत्रित सट्टेबाजी के कारण रुपये में काफी गिरावट आई है। इससे बचने के लिए भुगतान संतुलन के मोर्चे पर संरचनात्मक बदलाव करने होंगे। आयात प्रतिस्थापन और निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता के साथ वैश्विक मूल्य शृंखला में एकीकरण के सुरक्षा उपायों को व्यवस्थित करना होगा।
भुगतान संतुलन की समस्या से निपटने के लिए व्यापक उपाय जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर रहने और परिवहन एवं बीमा लागत में भारी वृद्धि के कारण देश के भुगतान संतुलन पर असर पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए नीतिगत स्तर पर एक व्यापक पैकेज लागू करने की जरूरत है। विदेश में रह रहे भारतीयों के लिए बॉन्ड जारी करना भी बेहतर विकल्प हो सकता है। एसबीआई की यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार को ईरान संकट के कारण विदेशी मुद्रा बचाने, ईंधन का सूझबूझ से उपयोग करने, सोने की खरीद रोकने और विदेश यात्रा टालने की अपील के बाद आई है।
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चौथी तिमाही में 7.2 फीसदी रहेगी वृद्धि दर
एसबीआई रिसर्च ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.2 फीसदी के करीब रह सकती है। वहीं, 2026-27 में अर्थव्यवस्था 6.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ सकती है। 2025-26 में वृद्धि दर 7.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय 29 मई को 2025-26 के लिए सालाना जीडीपी के अस्थायी अनुमान के साथ चौथी तिमाही के आंकड़े जारी करेगा।