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गर्मियों में परिवार संग घूमने का प्लान? उत्तराखंड के इस ट्रेक पर मिलेगा एडवेंचर और सुकून


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Kartik Swami Trek Rudrapryag: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में मौजूद कार्तिक स्वामी ट्रेक इन दिनों पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. सिर्फ 3 किलोमीटर लंबे इस आसान ट्रेक पर बच्चे और बुजुर्ग भी आराम से पहुंच जाते हैं. रास्ते में घने जंगल, ठंडी हवा और पहाड़ों की खूबसूरती यात्रियों का मन मोह लेती है. ट्रेक पूरा करते ही हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का 360 डिग्री दृश्य दिखाई देता है, जो इस जगह को और खास बना देता है. धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम होने की वजह से यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं.

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित कार्तिक स्वामी ट्रेक इन दिनों पर्यटकों और श्रद्धालुओं की पसंद बनता जा रहा है. यह ट्रेक उन लोगों के लिए खास माना जाता है, जो कम दूरी में शानदार प्राकृतिक नजारों और धार्मिक आस्था का अनुभव लेना चाहते हैं. करीब 3 किलोमीटर लंबा यह ट्रेक कनकचौरी गांव से शुरू होता है. रास्ता पत्थर की सीढ़ियों और घने जंगलों से होकर गुजरता है, इसलिए इसे आसान ट्रेक की श्रेणी में रखा जाता है. बुजुर्ग और बच्चे भी इस यात्रा को आसानी से पूरा कर लेते हैं. ट्रेक के दौरान ठंडी हवा और पहाड़ों की शांति यात्रियों को सुकून देती है. 

360 degree Himalayan view becomes the center of attraction

पर्वतारोही भुवन चौबे ने लोकल 18 को बताया कि कार्तिक स्वामी मंदिर करीब 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां पहुंचते ही यात्रियों को हिमालय की कई ऊंची चोटियों का शानदार दृश्य देखने को मिलता है. खास बात यह है कि यहां से चौखंबा, नीलकंठ और आसपास की बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाएं 360 डिग्री एंगल में दिखाई देती हैं. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यह नजारा और भी मनमोहक हो जाता है. कई पर्यटक केवल फोटोग्राफी और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं. साफ मौसम में दूर तक फैली हिमालय की चोटियां साफ दिखाई देती हैं.

The exciting journey begins from Kanakchauri village.

कार्तिक स्वामी ट्रेक की शुरुआत कनकचौरी गांव से होती है, जिसे इस यात्रा का बेस कैंप माना जाता है. रुद्रप्रयाग से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. यहां टैक्सी और स्थानीय बसों की सुविधा भी उपलब्ध रहती है. कनकचौरी पहुंचते ही यात्रियों को पहाड़ी गांवों की सुंदरता और शांत वातावरण का अनुभव मिलता है. गांव से ट्रेक शुरू होते ही रास्ते में घने जंगल और पहाड़ी दृश्य रोमांच बढ़ा देते हैं. कई पर्यटक यहां रुककर स्थानीय खानपान का स्वाद भी लेते हैं. यही वजह है कि कनकचौरी गांव भी धीरे-धीरे पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है.

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कार्तिक स्वामी ट्रेक का रास्ता प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है. ट्रेक के दौरान यात्रियों को बुरांश और ओक के घने जंगल देखने को मिलते हैं. मार्च और अप्रैल के महीनों में बुरांश के लाल फूल पूरे जंगल को रंगीन बना देते हैं. ठंडी हवा और पेड़ों के बीच पक्षियों की आवाज यात्रा को और खास बना देती है. कई लोग इस ट्रेक को प्रकृति के करीब जाने का बेहतरीन अवसर मानते हैं. रास्ते में छोटे-छोटे विश्राम स्थल भी बने हैं, जहां यात्री आराम कर सकते हैं. जंगलों के बीच बना शांत वातावरण शहरों की भागदौड़ से दूर सुकून का अनुभव देता है. यही प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों को बार-बार यहां आने के लिए आकर्षित करती है.

कार्तिक स्वामी ट्रेक का रास्ता प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है. ट्रेक के दौरान यात्रियों को बुरांश और ओक (बांज) के घने जंगल देखने को मिलते हैं. मार्च और अप्रैल के महीनों में बुरांश के लाल फूल पूरे जंगल को रंगीन बना देते हैं. ठंडी हवा और पेड़ों के बीच पक्षियों की आवाज यात्रा को और खास बना देती है. कई लोग इस ट्रेक को प्रकृति के करीब जाने का बेहतरीन अवसर मानते हैं. रास्ते में छोटे-छोटे विश्राम स्थल भी बने हैं, जहां यात्री आराम कर सकते हैं. जंगलों के बीच बना शांत वातावरण शहरों की भागदौड़ से दूर सुकून का अनुभव देता है.

कार्तिक स्वामी मंदिर धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि यह मंदिर भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है. मंदिर परिसर से दिखने वाले हिमालयी दृश्य श्रद्धा और प्रकृति का अनोखा संगम प्रस्तुत करते हैं. यही कारण है कि यह स्थान ट्रेकिंग के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है.

कार्तिक स्वामी मंदिर धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि यह मंदिर भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है. मंदिर परिसर से दिखने वाले हिमालयी दृश्य श्रद्धा और प्रकृति का अनोखा संगम प्रस्तुत करते हैं. यही कारण है कि यह स्थान ट्रेकिंग के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है.

कार्तिक स्वामी ट्रेक पर जाने के लिए मार्च से जून और अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इन महीनों में मौसम साफ रहता है और हिमालय की चोटियां स्पष्ट दिखाई देती हैं. गर्मियों में यहां का तापमान सुहावना रहता है, जिससे ट्रेक करना आसान हो जाता है. वहीं अक्टूबर और नवंबर में आसमान साफ होने के कारण सूर्योदय और सूर्यास्त के शानदार दृश्य देखने को मिलते हैं. बरसात के मौसम में रास्ता फिसलन भरा हो सकता है, इसलिए इस समय यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है. सर्दियों में यहां बर्फबारी भी होती है, जो रोमांच पसंद पर्यटकों को आकर्षित करती है. सही मौसम में यात्रा करने से ट्रेक का अनुभव और यादगार बन जाता है.

कार्तिक स्वामी ट्रेक पर जाने के लिए मार्च से जून और अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इन महीनों में मौसम साफ रहता है और हिमालय की चोटियां स्पष्ट दिखाई देती हैं. गर्मियों में यहां का तापमान सुहावना रहता है, जिससे ट्रेक करना आसान हो जाता है. वहीं अक्टूबर और नवंबर में आसमान साफ होने के कारण सूर्योदय और सूर्यास्त के शानदार दृश्य देखने को मिलते हैं. बरसात के मौसम में रास्ता फिसलन भरा हो सकता है. सर्दियों में यहां बर्फबारी भी होती है, जो रोमांच पसंद पर्यटकों को आकर्षित करती है.

Important precautions for travelers

कार्तिक स्वामी ट्रेक आसान जरूर है, लेकिन यात्रा के दौरान कुछ जरूरी सावधानियां रखना बेहद जरूरी माना जाता है. यहां आने वाले यात्री अच्छे ग्रिप वाले जूते पहने, ताकि पत्थर की सीढ़ियों पर फिसलन से बचा जा सके. साथ में पानी की बोतल और हल्का सामान रखना बेहतर रहता है. पहाड़ी मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए हल्के गर्म कपड़े साथ रखना भी जरूरी है. सुबह जल्दी ट्रेक शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि दिन में मौसम बदलने की संभावना रहती है. सावधानी और तैयारी के साथ यह यात्रा बेहद सुखद अनुभव बन जाती है.

Get relief amidst weak mobile network

कार्तिक स्वामी ट्रेक के दौरान मोबाइल नेटवर्क काफी कमजोर रहता है. कई जगहों पर नेटवर्क पूरी तरह गायब हो जाता है, हालांकि कुछ स्थानों पर Jio और BSNL की सेवाएं काम करती हैं. नेटवर्क की कमी के बावजूद पर्यटक इसे यहां की खासियत मानते हैं, क्योंकि इससे लोगों को प्रकृति के बीच समय बिताने का मौका मिलता है. शहरों की भागदौड़ और मोबाइल की दुनिया से दूर यहां का शांत वातावरण मानसिक सुकून देता है. कई यात्री इस ट्रेक को डिजिटल डिटॉक्स का बेहतरीन माध्यम भी मानते हैं.

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