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BHAVYA: केंद्र ने 33,660 करोड़ रुपये के औद्योगिक पार्क के लिए राज्यों से आवेदन मांगे, जानिए पूरा मामला


केंद्र सरकार ने राज्यों को भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के तहत 50 औद्योगिक पार्क स्थापित करने का अवसर दिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 33,660 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। राज्यों के पास आवेदन करने के लिए चार महीने का समय है। यह पहल देश में विश्व स्तरीय औद्योगिक बुनियादी ढांचा तैयार करेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 मार्च को देश भर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने की इस योजना को मंजूरी दी थी। इसका मुख्य लक्ष्य विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देना और आर्थिक वृद्धि को गति देना है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मीडिया को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले दो महीनों में 20 पार्कों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इसके बाद अगले दो महीनों में 30 और पार्कों के लिए आवेदन मांगे जाएंगे। यह 50 पार्क पहले चरण में स्वीकृत होंगे, जबकि शेष 50 अगले चरण में बनेंगे। योजना का क्रियान्वयन राज्यों और निजी क्षेत्र के खिलाड़ियों की साझेदारी से होगा।

योजना की मुख्य बातें

इस योजना के तहत 100 से 1,000 एकड़ तक के औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। बुनियादी ढांचा विकास के लिए प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मिलेगी। पहाड़ी राज्यों के लिए 25 एकड़ भूमि पर भी पार्क स्वीकृत हो सकता है। चयन प्रक्रिया “चुनौती विधि” के माध्यम से होगी। जो राज्य बेहतर सुविधाएं जैसे भूमि, पानी और बिजली देंगे, वे निवेशकों को आकर्षित कर पाएंगे। राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और हरियाणा जैसे राज्य इसमें गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

निजी साझेदारी और प्रक्रिया

योजना में राज्यों के लिए निजी खिलाड़ियों के साथ साझेदारी का भी प्रावधान है। ऐसे प्रस्तावों के लिए केंद्र प्रति एकड़ 50 लाख रुपये की सहायता देगा। पीयूष गोयल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसमें भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि अगले चार महीनों में 50 औद्योगिक पार्कों के लिए आवेदन मांगे जा रहे हैं। राज्यों को विशेष प्रयोजन वाहन स्थापित करना होगा। उन्हें एक योजना प्राधिकरण अधिसूचित करना होगा और एकल खिड़की निकासी तंत्र बनाना होगा।

आर्थिक विकास और लाभ

भव्य योजना क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा देगी। यह उद्योगों, आपूर्तिकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं के सह-स्थान को सक्षम बनाएगी। इससे घरेलू आपूर्ति शृंखलाएं मजबूत होंगी और क्षेत्रीय औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा। यह लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगी। विनिर्माण इकाइयों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप और वैश्विक निवेशकों को इसका लाभ मिलेगा। पीयूष गोयल ने उम्मीद जताई कि तीन साल में ये 50 पार्क चालू हो जाएंगे।



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