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ग्लेशियर, बुग्याल और झीलें…केदारनाथ-बद्रीनाथ के बीच छिपा है उत्तराखंड का शानदार ट्रेक


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Uttarakhand Trekking Routes: उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम को जोड़ने वाला एक प्राचीन पैदल मार्ग आज ट्रेकिंग प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है. वरिष्ठ पर्वतारोही भुवन चौबे के अनुसार, पुराने समय में श्रद्धालु इसी दुर्गम रास्ते से दोनों धामों की यात्रा पैदल करते थे. समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित यह ट्रेक रोमांच और अध्यात्म का एक अनूठा संगम है. केदारनाथ से शुरू होकर चमोली के घाट क्षेत्र से होते हुए बद्रीनाथ तक पहुंचने वाले इस ट्रेक को पूरा करने में 4 से 5 दिन का समय और लगभग 25,000 से 30,000 रुपये का खर्च आता है.

Uttarakhand Trekking Routes: उत्तराखंड में स्थित बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के बारे में तो लगभग हर श्रद्धालु और पर्यटक जानता है, लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता है कि इन दोनों पवित्र धामों को आपस में जोड़ने वाला एक प्राचीन पैदल मार्ग भी मौजूद है. यह पुराना रास्ता आज के समय में ट्रेकिंग के शौकीनों के बीच एक बेहद लोकप्रिय हाई एल्टीट्यूड ट्रेक बन चुका है. हिमालय की ऊंची चोटियों, खूबसूरत ग्लेशियरों और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह ट्रेक रोमांच पसंद करने वाले लोगों और आध्यात्मिक अनुभव की तलाश करने वाले यात्रियों को एक अनूठा अवसर प्रदान करता है.

जानिए क्या है इस ऐतिहासिक मार्ग का इतिहास
वरिष्ठ पर्वतारोही भुवन चौबे ने बताया कि पुराने समय में जब पहाड़ों में सड़कों और वाहनों की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तब श्रद्धालु गौरीकुंड से पैदल चलकर केदारनाथ पहुंचते थे. बाबा केदारनाथ के दर्शन और वहां विश्राम करने के बाद वे वासुकी ताल की ओर आगे बढ़ते हुए बद्रीनाथ के लिए इसी पैदल रास्ते से यात्रा करते थे. यह खूबसूरत ट्रेक केदारनाथ से शुरू होता है और वासुकी ताल, ऊंचे हिमालयी दर्रों और मखमली बुग्यालों से गुजरता हुआ चमोली जिले के घाट क्षेत्र तक पहुंचता है. इसके बाद ट्रेकर्स बद्रीनाथ की ओर आगे का सफर तय करते हैं. पूरे रास्ते में बर्फ से ढकी चोटियां, दुर्लभ वनस्पतियां और प्राकृतिक झीलें यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.

जानें कैसे जा सकते हैं आप यहां
यह यात्रा सामान्य ट्रेकिंग रूटों की तुलना में काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसका अधिकांश मार्ग समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है. इसी कारण इस ट्रेक पर जाने वाले यात्रियों का शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट होना बेहद आवश्यक है. यहां पहाड़ों का मौसम भी बहुत तेजी से बदलता है, इसलिए पर्याप्त तैयारी के साथ ही कदम आगे बढ़ाने चाहिए. सुरक्षा के लिहाज से इस मार्ग पर जाने से पहले वन विभाग और संबंधित प्रशासनिक विभागों से आवश्यक अनुमति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है. बिना परमिशन के इस ट्रेक पर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है. इसके साथ ही यात्रियों को किसी अनुभवी ट्रेक गाइड और स्थानीय हेल्पर को अपने साथ ले जाने की सलाह दी जाती है.

सफर का कुल समय और खर्च
केदारनाथ से बद्रीनाथ तक के इस ऐतिहासिक और साहसिक ट्रेक को सफलतापूर्वक पूरा करने में लगभग चार से पांच दिन का समय लगता है. इस दौरान होने वाले खर्च की बात करें तो ट्रेक पर प्रतिदिन लगभग 2,000 से 4,000 रुपये तक का खर्च आ सकता है. इस दैनिक खर्च में गाइड की फीस, भोजन, कैंपिंग टेंट और अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल होती हैं. अगर पूरी यात्रा के बजट की बात करें तो इस रूट को पूरा करने में कुल खर्च 25,000 से 30,000 रुपये तक पहुंच जाता है. प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व से भरपूर यह ट्रेक उन लोगों के लिए किसी सपने जैसा है जो हिमालय को बहुत करीब से महसूस करना चाहते हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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