वैश्विक तनाव, कमजोर रुपया, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल ने शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव पैदा कर दिया है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही निवेशकों की चिंता भी बढ़ गई है। कई खुदरा निवेशकों का पोर्टफोलियो लाल निशान में पहुंच चुका है। बाजार सुबह तेजी से खुलता है और शाम तक गिरावट में पहुंच जाता है। ऐसे माहौल में बड़ी संख्या में लोग घबराकर अपने शेयर बेचने का मन बना रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बाजार से भागने का नहीं, बल्कि अपने निवेश को समझदारी से दोबारा संतुलित करने का समय है।
क्यों बढ़ रहा है निवेशकों में डर?
नोएडा में आईटी कंपनी में काम करने वाले सन्नी गोयल जैसे लाखों निवेशक इन दिनों बाजार की गिरावट से परेशान हैं। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इस साल अब तक नकारात्मक रिटर्न दे चुके हैं। सेंसेक्स में 11.73 प्रतिशत और निफ्टी में 9.66 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर होता रुपया, खाड़ी क्षेत्र में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। ऐसे माहौल में कई लोग घाटे में शेयर बेचकर बाहर निकलना चाहते हैं। हालांकि विशेषज्ञ इसे बड़ी गलती मान रहे हैं।
ऐसे समय में निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में अनिश्चितता के समय सबसे पहले अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि आपका पैसा इक्विटी, डेट, सोना और नकद के बीच सही तरीके से बंटा है या नहीं। अगर बाजार की तेजी में इक्विटी का हिस्सा बहुत ज्यादा बढ़ गया है तो कुछ मुनाफा निकालकर डेट या सोने में निवेश करना बेहतर हो सकता है। इसे रीबैलेंसिंग कहा जाता है। इसके साथ ही निवेशकों को अपने स्टॉक और म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन की तुलना बेंचमार्क इंडेक्स से भी करनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए निवेशकों को संतुलित पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। पूरा पैसा सिर्फ शेयर बाजार में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। आइए, टेबल के जरिए समझने की कोशिश करते हैं…
| एसेट क्लास | हिस्सेदारी | क्यों जरूरी है |
|---|---|---|
| लार्जकैप इक्विटी/इंडेक्स फंड | 40-50% | बाजार गिरावट का झटका सहने की क्षमता ज्यादा |
| मिडकैप और स्मॉलकैप | 15-20% | लंबी अवधि में ग्रोथ के अवसर |
| डेट इंस्ट्रूमेंट्स | 20-25% | स्थिर रिटर्न और सुरक्षा |
| सोना | 10-15% | महंगाई और वैश्विक तनाव से सुरक्षा |
| नकद/लिक्विड फंड | 5-10% | गिरावट में सस्ते निवेश का मौका |
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किन कंपनियों और सेक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ तेजी से भागते शेयरों के पीछे नहीं दौड़ना चाहिए। निवेश करने से पहले कंपनियों की कमाई, कर्ज और बिजनेस की मजबूती जरूर देखनी चाहिए। मौजूदा समय में कुछ सेक्टर्स ने बेहतर प्रदर्शन किया है। कैपिटल मार्केट सेक्टर ने 20.82 प्रतिशत रिटर्न दिया है। इसके अलावा मेटल सेक्टर में 18.14 प्रतिशत, डिफेंस में 17.29 प्रतिशत और एनर्जी सेक्टर में 14.58 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली है। इन सेक्टर्स को वैश्विक हालात और बढ़ती मांग का फायदा मिला है।
रिसर्च आधारित निवेश क्यों जरूरी माना जा रहा?
वित्तीय विशेषज्ञ अरुण कुमार मंत्री का कहना है कि मौजूदा समय में निवेश पूरी तरह रिसर्च और गुणवत्ता पर आधारित होना चाहिए। केवल मोमेंटम देखकर पैसा लगाना खतरनाक साबित हो सकता है। उनका कहना है कि पोर्टफोलियो संतुलित और विविधीकृत होना चाहिए। किसी एक सेक्टर या एक ही तरह के निवेश में ज्यादा पैसा लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। मजबूत कमाई, कम कर्ज और अच्छा कैश फ्लो वाली कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
निवेशकों के लिए कौन-से गोल्डन रूल जरूरी?
विशेषज्ञों के मुताबिक निवेश और ट्रेडिंग को अलग रखना चाहिए। बाजार गिरने पर मजबूत कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर माना जाता है। बिना स्टॉप लॉस के ट्रेडिंग नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा निवेशकों को आयात पर ज्यादा निर्भर सेक्टर्स से दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है। कमजोर रुपये और महंगे कच्चे तेल के दौर में आईटी, फार्मा और एफएमसीजी जैसे निर्यात आधारित सेक्टर्स को बेहतर माना जा रहा है।
क्या बाजार से भागना सही फैसला होगा?
विशेषज्ञ साफ कह रहे हैं कि हर गिरावट के समय बाजार छोड़ना सही रणनीति नहीं होती। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है। ऐसे समय में घबराकर नुकसान में निवेश बेचने के बजाय लंबी अवधि की सोच और अनुशासन जरूरी होता है। सही एसेट एलोकेशन, रिसर्च और धैर्य के जरिए ही निवेशक मुश्किल समय में अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रख सकते हैं।
निवेश से पहले क्या सावधानी जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है। हर निवेशक की आय, जरूरत और लक्ष्य अलग होते हैं। इसलिए किसी भी निवेश का फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।



